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भारतीय छात्र अब अमेरिका के बजाय नए देशों का कर रहे रुख

नई दिल्ली। भारतीय विद्यार्थियों के विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के सपनों में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ पहले अमेरिका सबसे पसंदीदा गंतव्य हुआ करता था, वहीं अब नई पीढ़ी के छात्र नए विकल्पों की तलाश में हैं। अमेरिका की सख्त वीज़ा नीतियां, अत्यधिक ट्यूशन फीस, बढ़ते रहन-सहन के खर्च और पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसरों में अनिश्चितता ने छात्रों को दूसरे देशों की ओर सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब विद्यार्थी केवल किसी देश के ब्रांड नेम पर नहीं जाते, बल्कि वे अपनी पढ़ाई के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पढ़ाई में लगाया गया पैसा करियर ग्रोथ और भविष्य में सही भरपाई दे।

इसी सोच के चलते भारतीय युवा अब यूरोप, एशिया और यहाँ तक कि लैटिन अमेरिका के कई उभरते शिक्षा केंद्रों का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, आयरलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड्स और फ्रांस जैसे देश तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। जर्मनी अपनी मुफ्त या बेहद कम ट्यूशन फीस के कारण विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित छात्रों को आकर्षित कर रहा है, जहाँ पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट भी मिलता है। आयरलैंड आईटी, डेटा साइंस और फार्मा सेक्टर के लिए यूरोपीय संघ का बड़ा हब बन चुका है और यहाँ 2 साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीज़ा भी आसानी से मिलता है। जापान और दक्षिण कोरिया, अपनी भाषा की बाधा को तोड़ते हुए, टेक और रोबोटिक्स में रुचि रखने वाले छात्रों को कई स्कॉलरशिप के अवसर प्रदान कर रहे हैं। नीदरलैंड्स और फ्रांस बिजनेस मैनेजमेंट, आर्ट्स और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े कोर्स के लिए तेजी से पसंदीदा बन रहे हैं।

विदेश में पढ़ाई के कोर्स में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले ज्यादातर भारतीय छात्र केवल कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग या एमबीए करने विदेश जाते थे, वहीं अब ट्रेंड में बदलाव आया है। आज के युवा भविष्य की जरूरतों के हिसाब से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, सस्टेनेबिलिटी, ग्रीन एनर्जी, हेल्थकेयर, बायोटेक, डेटा एनालिटिक्स और फिनटेक जैसे नए और उन्नत कोर्स को तवज्जो दे रहे हैं। जानकारों के अनुसार, विदेश में पढ़ाई का फैसला करते समय केवल यूनिवर्सिटी की रैंकिंग देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। छात्रों को पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट की अवधि, स्थानीय भाषा और संस्कृति को सीखने की आवश्यकता, और पार्ट-टाइम काम के नियमों को भी दिमाग में रखना चाहिए। इससे छात्र अपने रहने का खर्च निकालने और करियर के अवसर सुरक्षित करने में मदद प्राप्त कर सकते हैं, जो उनके विदेश में पढ़ाई के अनुभव को और भी लाभदायक बना सकता है।

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