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देश के 45 प्रतिशत घरों में ईवी चार्जिंग सुरक्षित

नई दिल्ली । देश के करीब 45 प्रतिशत घरों में सुरक्षित ईवी चार्जिंग के लिए बिजली की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की तत्काल जरूरत है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की तेज रफ्तार के बीच एक नई रिपोर्ट ने चिंता जताई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू चार्जिंग ईवी यूजर्स का मुख्य तरीका होने के बावजूद, कई घरों में पर्याप्त विद्युत भार, सही वायरिंग और सेफ्टी इक्विपमेंट्स की कमी है। इससे आग लगने, सर्किट ओवरलोड और बैटरी खराब होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल 55 प्रतिशत संभावित ईवी खरीदारों के पास ही घर पर सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। एईईई और काझम द्वारा जारी इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट में 80 हजार से ज्यादा रेजिडेंशियल चार्जर इंस्टॉलेशन के डेटा का गहन विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में ईवी अपनाने की नीतियों के साथ-साथ घरों को ईवी-रेडी बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने की सलाह दी गई है, ताकि भारत अपने नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल कर सके।

 रिसर्च में पाया गया कि देशभर के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंडिपेंडेंट हाउस, अपार्टमेंट, बस्तियों और किराए के मकानों में चार्जिंग सुविधा असमान रूप से उपलब्ध है। कई घर पुरानी विद्युत व्यवस्था पर निर्भर हैं, जो ईवी चार्जिंग के लिए बिल्कुल भी सूटेबल नहीं है और जोखिम भरे हैं। अनौपचारिक तरीके से नॉर्मल सॉकेट, एक्सटेंशन केबल या शेयर किए गए कनेक्शन से चार्जिंग करने पर आग लगने का खतरा, इलेक्ट्रिक फॉल्ट, इक्विपमेंट में खराबी, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, वायरिंग ओवरहीटिंग और लोकल पावर आउटेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे चार्जिंग की विश्वसनीयता कम होगी और ईवी बैटरी की लाइफ भी जल्दी खराब हो सकती है। पुराने घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स और अनौपचारिक बस्तियों में ये चुनौती और भी गंभीर है, जहां पार्किंग और रेट्रोफिट गाइडलाइंस की कमी है। रिपोर्ट में घरों को ईवी-रेडी बनाने के लिए न्यूनतम मानक तय किए गए हैं। इनमें पर्याप्त स्वीकृत विद्युत भार, डेडिकेटेड चार्जिंग सर्किट, कंप्लायंट वायरिंग और अर्थिंग, सही तरीके से लगाए गए चार्जर, रेटेड एमसीबीएस, अर्थ-लीकेज प्रोटेक्शन और सर्टिफाइड ईवी सब-मीटर शामिल हैं, जो सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। साथ ही, बिल्डिंग कोड, इलेक्ट्रिक सेफ्टी स्टैंडर्ड और ईवी चार्जिंग गाइडलाइंस को इंटीग्रेट करने वाला एक नेशनल फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इससे सुरक्षा बढ़ेगी और अपग्रेड की लागत जैसी चिंताओं का समाधान होगा। ये रिपोर्ट दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी के साथ आई है, जिसमें 2027 से पेट्रोल-सीएनजी थ्री-व्हीलर और 2028 से पेट्रोल टू-व्हीलर की नई रजिस्ट्रेशन बंद करने का फैसला शामिल है। 

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