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यूरोप में 43 डिग्री बनाम चीन में 50 डिग्री

लंदन। दुनिया वर्तमान में भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां यूरोप और उत्तरी अमेरिका 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान से जूझ रहे हैं, वहीं चीन के कुछ हिस्सों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। हालांकि, जहां यूरोप में गर्मी से हाहाकार मचा है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, वहीं चीन आश्चर्यजनक रूप से चुनौती का सामना कर रहा है, और इसका श्रेय एक अनोखी रूफटॉप रेन तकनीक को दे रहा है।

यूरोप में अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीज बढ़ रहे हैं और एयर कंडीशनर के लगातार चलने से बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव है। इसके विपरीत, चीन के शांक्सी से लेकर शिनजियांग जैसे क्षेत्र हर साल जून से अगस्त तक 44 से 50 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहते हैं, फिर भी यहां लू से होने वाली मौतों की संख्या यूरोप जितनी नहीं है। इसका प्रमुख कारण चीन के उत्तरी शांक्सी प्रांत के युन्चेंग जैसे शहरों में ऊंची इमारतों पर स्थापित खास रूफटॉप रेन सिस्टम है। यह प्रणाली छत से पानी की इतनी महीन फुहार छोड़ती है कि यह बारिश की तरह नहीं गिरती, बल्कि एक सूक्ष्म धुंध बनकर गर्म हवा में फैल जाती है। अनोखी तकनीक का वैज्ञानिक आधार इवैपोरेटिव कूलिंग यानी वाष्पीकरण के जरिये ठंडक पैदा करना है। जब पानी की ये बेहद छोटी बूंदें गर्म हवा के संपर्क में आती हैं, तब वे तुरंत भाप बनकर वातावरण की गर्मी को सोख लेती हैं, जिससे आसपास का तापमान कम होता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह प्रक्रिया इमारत के आसपास के तापमान को करीब 8 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ बहुत गर्म और शुष्क दिनों में ही प्रभावी होता है और हवा में नमी होने पर इसका असर कम हो जाता है। इसकारण इस बारिश समझने की भूल नहीं करनी चाहिए; यह वास्तव में एक बेहद बारीक धुंध है जो हवा में ही गायब हो जाती है।

सोशल मीडिया पर इस तकनीक के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे दुनिया भर के विशेषज्ञ और आम लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि ऐसी व्यवस्था अन्य देशों में क्यों नहीं अपनाई जा रही। हालांकि, इस पर अभी भी कुछ सवाल कायम हैं, जैसे बड़े पैमाने पर इसके लिए कितने पानी की आवश्यकता होगी और फुहार मशीनों में खनिज जमा होने की समस्या। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह सिर्फ बाहरी तापमान को कम करती है या घरों के अंदर भी पर्याप्त ठंडक प्रदान करती है। इसके बावजूद, चीन ने कई शहरों में इसे अपनाना शुरू कर दिया है, जिससे यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में भीषण गर्मी से जूझती दुनिया के लिए यह एक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल समाधान बन सकता है। आने वाले समय में, एयर कंडीशनर के साथ-साथ यह छत की बारिश भी गर्मी से राहत का एक नया हथियार साबित हो सकती है।

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