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आप जानते हैं कि यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए हर साल तेरह लाख से अधिक बच्चे तैयारी करते हैं हर साल भारत में लगभग 11 लाख से 13 लाख छात्र यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। यानि हर साल औसतन 11 से 13 लाख उम्मीदवार फॉर्म भरते हैं।प्रारंभिक परीक्षा में इनमें से लगभग 50ः से 55ः छात्र ही (यानी करीब 5 से 6 लाख) वास्तव में परीक्षा देने आते हैं।
मुख्य परीक्षाः प्रारंभिक परीक्षा पास करके लगभग 14,000 से 15,000 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा तक पहुँचते हैं। इसके बाद लगभग 2,500 से 3,000 छात्र साक्षात्कार के लिए चुने जाते हैं। आखिर में लगभग 800 से 1,000 उम्मीदवारों का चयन अंतिम सूची में होता है।दर्जनों अभ्यर्थी हर साल इस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने असफल रहने या बार बार असफल होने पर अवसाद ग्रस्त होकर कई बार सुसाइड तक कर लेते हैं। यह सब बताने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि जिस भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के लिए करीब पंद्रह लाख युवा हर साल सपना देखते हैं दिन रात भूख- प्यास त्यौहार - उत्सव सब की चकाचौंध से किनारा कर सिर्फ एक नियुक्ति पाना जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं लेकिन यदि कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी जिसकी 17 साल सेवा बाकी हो जिनको कई पदोन्नति भी मिल सकती है पूरे होशो हवास में सिर्फ तेरह साल की सर्विस कर प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दे तो इसे किस तरह देखा जाएगा?
यूपी कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया। वर्तमान समय में वह राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद पर तैनात थीं। दिव्या मित्तल ने बाद सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर अपने इस्तीफे की जानकारी शेयर की।इस्तीफे से सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस गंभीर मामले में राज्यपाल को पत्र लिखकर अधिकारियों के सम्मान की रक्षा की मांग की है। आपको बता दें कि मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकीं दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल और जनसरोकार से जुड़े कामों को लेकर चर्चा में रही हैं। आप जानते हैं कि सिर्फ शोहरत और दौलत हासिल कर लेना ही की बार व्यक्ति की आत्मसंतुष्टि नहीं कर पाता है। दरअसल जिसको हासिल नहीं होता है वह खोजने पाने के लिए बेचौन हो जाता है लेकिन जिसे हासिल होता है उसे वह प्राप्त भी कई बार मिथ्या नज़र आता है। दिव्या मित्तल पहले उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जिलाधिकारी रह चुकी हैं। मई के पहले सप्ताह में उन्हें देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व विभाग में तैनाती दी गई थी। डीएम पद से हटाए जाने के बाद उनकी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में रही थीं। अब उनके इस्तीफे के बाद एक बार फिर उनकी कार्यशैली, पिछली तैनातियों और इस्तीफे की वजह को लेकर बहस शुरू हो गई है। फिलहाल इस्तीफे की असली वजह क्या है, इस पर दिव्या मित्तल की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने बीते रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ग् पर दी थी। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे की कोई वजह नहीं बताई। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर यूपी की सियासत तक उनके इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। अब भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल की कार्यशैली और उनके इस्तीफे को लेकर कई सवाल उठाए हैंप्रशांत उमराव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिव्या मित्तल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस्तीफे के पीछे राहुल गांधी से मुलाकात का दावा करते हुए सवाल खड़े किए। हालांकि, आईएएस अधिकारी की ओर से इसकी कोई वजह नहीं बताई गई है।प्रशांत उमराव ने ग् पर लिखा कि दिव्या मित्तल ने इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि राहुल गांधी से मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने दिव्या मित्तल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए लिखा कि उनमें हमेशा बड़े पद पर रहने की इच्छा थी और संयुक्त सचिव का पद उन्हें पसंद नहीं आया। उन्होंने यह भी दावा किया कि डीएम के बाद सीधे कमिश्नर बनने की इच्छा थी।प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल की कार्यशैली को लेकर सवाल करते हुए कहा कि जिन जिलों में वह तैनात रहीं, वहां किसी न किसी जनप्रतिनिधि से उनका तालमेल नहीं बन पाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अलग-अलग जगहों पर जनप्रतिनिधियों से परेशानी रही तो हर जगह जनप्रतिनिधि गलत नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं के प्रचार और उद्घाटन को लेकर भी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे। प्रशांत उमराव ने दावा किया कि केंद्र सरकार की हर घर योजना को भी उनके प्रयास के तौर पर प्रचारित किया गया और स्थानीय सांसद को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।
उधर विपक्ष दिव्या मित्तल के इस्तीफे को मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को एक पत्र भेजा है। यह पत्र 2013 बैच की महिला आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा 30 अगस्त को सोशल मीडिया पर लगभग 13 वर्ष की सेवा के बाद अपने त्यागपत्र को सार्वजनिक करने के संबंध में लिखा गया है। इस घटना के माध्यम से प्रदेश में सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों के सम्मान और स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा करने का आग्रह किया गया है ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।
दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण ईमानदार अधिकारियों को सम्मान नहीं मिल रहा है, जिससे कई अफसर रिटायरमेंट की इच्छा जता रहे हैं। उन्होंने मंदिर चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्र काम का मौका न मिलना पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
आपको बता दें आइएएस दिव्या मित्तल मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी की निवासी हैं, लेकिन उनका जन्म दिल्ली में ही हुआ। उनकी पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई। 10वीं और 12वीं करने के बाद दिल्ली में ही बीटेक किया और फिर आइआइएम बेंगलुरु से एमबीए की। इसके बाद उनकी शादी हो गई। उनकी और पति गगनदीप सिंह की लंदन में बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी भी लग गई थी, लेकिन देश प्रेम इतना वह वहां ज्यादा दिन तक नहीं रह पाईं।
पति-पत्नी ने इस्तीफा देकर लंदन से वापस लौटने का फैसला किया और हुआ भी यही। दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह ने भी यूपीएससी क्वालीफाई कर सिविल सर्विस हासिल की। उन्होंने 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा अधिकारी के रूप में केंद्र सरकार में सेवाएं दी थीं। उन्होंने 4 साल पहले यानी साल 2022 में प्रशासनिक सेवा से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था।दोनों का एजुकेशनल और प्रोफेशनल बैकग्राउंड बेहद प्रभावशाली रहा है। कॉरपोरेट दुनिया से लेकर सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास करने और फिर खुद अपनी मर्जी से सरकारी सेवा छोड़ने तक, दोनों का सफर काफी हद तक एक जैसा रहा है
हालांकि दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दार्शनिक अंदाज में अपनी भावनाएं प्रकट की। उन्होंने लिखा, आज मैंने 13 सालों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए आईएएस से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। लेकिन सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। मैं लौट आई और आईएएस अधिकारी बनने का सौभाग्य मिलाआईएएस ऑफिसर ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, ‘बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मिर्जापुर ने सिखाया कि असंभव कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आंखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति है। उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।’दिव्या मित्तल ने अपने भावुक पोस्ट में लिखा, ‘मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला कि मेरी झोली पूरी भर गयी। इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।’
उधर अभी दिव्या मित्तल के इस्तीफे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत केंद्र व राज्य सरकार के निर्णय से गुजरना होगा। सरकार चाहे तो उनका इस्तीफा अस्वीकार भी कर सकती है। मीडिया पर जो खबरें छन कर आ रहीं हैं वह कुछ और कहानी कह रही है कुछ रिपोर्ट्स में दिव्या मित्तल को बहुत महत्वाकांक्षी बताया जा रहा है। दिव्या मित्तल के राजनीति में जाने की चर्चा का एक कारण उनका मिर्जापुर से जुड़ा कार्यकाल भी बताया जा रहा है। वह मिर्जापुर की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल के दौरान अपना दल से जुड़े नेताओं अनुप्रिया पटेल और आशीष पटेल के साथ विवाद जैसी स्थितियों की चर्चा भी सामने आती रही थी।इसी वजह से अब सोशल मीडिया पर यह कयास लगा रहे हैं कि अगर दिव्या मित्तल राजनीति में आती हैं तो मिर्जापुर से चुनाव लड़ सकती हैं।हालांकि, यह फिलहाल सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही अटकलें हैं। दिव्या मित्तल की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिसमें उन्होंने राजनीति में जाने या चुनाव लड़ने की बात कही हो। बहुत संभावना यह है कि दिव्या मित्तल के इस्तीफे को फिल्हाल ठंडे बस्ते में डाल कर रखा जाएगा। क्योंकि यूपी चुनाव के मद्देनजर सरकार विपक्ष को कोई मुद्दा आसानी से हाथ नही देगी इतना ही नही मौजूदा तैनाती पर कार्य की ईच्छुक नहीं होने पर उन्हें लम्बे अवकाश पर भी भेजा जा सकता है ताकि विपक्ष के शोरगुल को विराम दिया जा सके।
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