Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles
Advertisement
Advertisement Banner

श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स में हिंदी माह का शुभारंभ

नई दिल्ली। श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय में राजभाषा समिति, गालियारा (हिंदी साहित्यिक सोसायटी) एवं IQAC के संयुक्त तत्वावधान में सितंबर माह को ‘हिंदी माह’ के रूप में मनाने का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी भाषा के प्रति विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय समुदाय में रुचि, सम्मान और जागरूकता विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ शब्द गायन से हुआ, जिसके पश्चात दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की विशिष्ट संकाय सदस्य एवं हिंदी की वरिष्ठ प्रहरी प्रो. ज्योति कौर ने हिंदी के महत्व और उसके व्यापक प्रयोग पर अपने विचार व्यक्त किए।

महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. कवल गिल ने अपने संबोधन में हिंदी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम न मानकर भारतीय संस्कृति, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव की भाषा बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया तथा हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।


राजभाषा कार्यान्वयन समिति एवं गालियारा की संयोजक डॉ. मीनाक्षी ने हिंदी माह के उद्देश्य और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि हिंदी का विकास तभी सार्थक है, जब उसका प्रयोग अकादमिक, प्रशासनिक और दैनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सहज रूप से बढ़े। IQAC संयोजक डॉ. रचना सेठ, प्रो. डी. डी. चतुर्वेदी तथा प्रो. रेखा शर्मा ने भी हिंदी की उपयोगिता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और वर्तमान समय में हिंदी की प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत एवं सार्थक बनाया।


हिंदी माह के अंतर्गत आशु भाषण प्रतियोगिता, कविता-पाठ प्रतियोगिता, निबंध लेखन एवं पोस्टर प्रतियोगिता, विशेष हिंदी कार्यशाला तथा समापन समारोह सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ हिंदी के प्रति उनके जुड़ाव को और सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीपा कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम ने हिंदी को राजभाषा के साथ-साथ ज्ञान, सृजन और संवाद की प्रभावी भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल का संदेश दिया।

Comments (0)

Leave a Comment