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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति भारतीय पेमेंट सिस्टम देख हुए गदगद

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने भारतीय पेमेंट सिस्टम की जमकर तारीफ की है और इसे एक कमाल का अनुभव बताया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने एक व्यक्तिगत अनुभव साझा किया जिसने उन्हें भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की दक्षता का कायल बना दिया। रामाफोसा ने बताया कि उन्होंने स्थानीय बाजार से किताबें खरीदीं और अपने कार्ड से भुगतान किया। खास बात यह थी कि यह भुगतान भारतीय रुपये में हुआ, जो अंततः उनके दक्षिण अफ्रीकी रैंड खाते से सेटल हुआ। उस समय, लगभग 1 रुपए की कीमत 5.93 दक्षिण अफ्रीकी रैंड के बराबर थी।

पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति रामाफोसा ने कहा कि उन्होंने इस अनुभव को बेहतरीन पाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस बारे में बात की। उन्होंने स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने के ब्रिक्स देशों के साझा लक्ष्य के संदर्भ में इस प्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा, हमने स्थानीय मुद्रा भुगतान प्रणाली में रुचि पर चर्चा की है, और हमारे केंद्रीय बैंक इस पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हम इस पर जल्द ही एक समझौते पर पहुंच जाएंगे। यह हमारे देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रामाफोसा ने स्पष्ट किया कि यह दृष्टिकोण किसी अन्य पेमेंट सिस्टम या मुद्रा के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह अपने देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने का एक व्यावहारिक और कुशल तरीका है।

ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में भी व्यापार और निवेश में स्थानीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल का समर्थन किया गया था। घोषणा में कहा गया था कि ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स सीमा पार भुगतान और मैसेजिंग सिस्टम की इंटरऑपरेबिलिटी का अध्ययन कर रहा है। इसका उद्देश्य तेज, सस्ते, आसान, पारदर्शी और सुरक्षित भुगतान के लिए और काम करने को प्रोत्साहित करना है। हालांकि, घोषणा में यह भी रेखांकित किया गया कि ये प्रयास राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करेंगे और सीमा पार भुगतान के लिए कोई एक ही तरीका नहीं अपनाया जा सकता, क्योंकि प्रत्येक देश की अपनी विशिष्ट वित्तीय संरचनाएं और आवश्यकताएं हैं। रामाफोसा ने ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत की नेतृत्व क्षमता और शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने चुनौतियों के बावजूद सभी सदस्य देशों को एकजुट कर नई दिल्ली घोषणा अपनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिखर सम्मेलन के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इसे बहुत अच्छी तरह से आयोजित सम्मेलन बताया। उन्होंने भारत को इस बात के लिए बधाई दी कि इतने बड़े और जटिल आयोजन में सब कुछ सुचारु रूप से संपन्न हुआ और कोई भी अप्रत्याशित घटना नहीं घटी। रामाफोसा के इन बयानों से भारत की डिजिटल प्रगति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका की स्वीकार्यता स्पष्ट रूप से झलकती है।


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