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दोगुनी नहीं होगी पूरी सैलरी

नई दिल्ली । 8वें वेतन आयोग के इंतजार में बैठे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि उनकी सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी। अक्सर माना जाता है कि अगर सरकार 2.0 का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तब कर्मचारियों की पूरी सैलरी दोगुनी हो जाएगी। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।

दरअसल, फिटमेंट फैक्टर केवल मूल वेतन (बेसिक सैलरी) पर लागू होता है, जबकि कर्मचारी के हाथ में आने वाली कुल सैलरी (ग्रॉस सैलरी) में कई तरह के भत्ते भी शामिल होते हैं। इसकारण बेसिक वेतन में भले ही 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाए, लेकिन ग्रॉस सैलरी में उतनी वृद्धि नहीं दिखती। केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी केवल मूल वेतन से नहीं बनती, बल्कि इसमें महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता (एचआरए), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (टीपीटीए) और अन्य कई भत्ते शामिल होते हैं। जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तब महंगाई भत्ता आमतौर पर नए बेसिक वेतन में समायोजित होकर शून्य से शुरू होता है। एचआरए नए बेसिक के आधार पर तय होता है, लेकिन कई अन्य भत्तों में तत्काल समान अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती, जिससे कुल सैलरी की वृद्धि सीमित रह जाती है।

पिछले वेतन आयोगों का रिकॉर्ड भी इस बात की पुष्टि करता है। चौथे वेतन आयोग में ग्रॉस सैलरी में लगभग 27.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पांचवें में यह 31 प्रतिशत रही। छठे वेतन आयोग में 1.86 फिटमेंट फैक्टर के बावजूद ग्रॉस सैलरी में करीब 54 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वहीं, सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मिलने के बाद भी कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी औसतन केवल 14.29 प्रतिशत ही बढ़ी। यह स्पष्ट करता है कि फिटमेंट फैक्टर जितना बड़ा हो, ग्रॉस सैलरी में उतनी ही अधिक वृद्धि होगी, यह जरूरी नहीं है। अनुमानित गणना के अनुसार, यदि 8वें वेतन आयोग में 2.0, 2.38 या 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो लेवल-1 से लेवल-10 तक के कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी में लगभग 31 प्रतिशत से 58 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इस प्रकार, 2.0 फिटमेंट फैक्टर का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि केंद्रीय कर्मचारी के हाथ में आने वाली पूरी सैलरी दोगुनी हो जाएगी। 


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