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एक कटु सत्य

किसी भी प्रजातांत्रिक देश में उसके प्रजातंत्र का मुख्य हिस्सा न्याय पालिका होती है, प्रजातंत्र के प्रमुख चार स्तंभों में सबसे प्रमुख स्तंभ यही है और यदि उसी प्रजातांत्रिक देश की न्याय पालिका स्वयं न्याय मांगती नजर आए तो फिर उस देश के प्रजातंत्र का भविष्य क्या हो सकता है? मन को व्यथित और दुखी करने वाला यह तथ्य मैं आज विश्व के किसी अन्य प्रजातांत्रिक देश नही, बल्कि अपने स्वयं के भारत के बारे में प्रकट कर रहा हूं। जिस देश के सर्वाेच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश स्वयं न्याय व्यवस्था व उसकी संचालन प्रणाली पर सवाल उठाए, उस देश का आम नागरिक सस्ते, सच्चे और निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कैसे कर सकता है? साथ ही जिस देश के उच्च न्यायालयों में तीन फीसदी से अधिक न्यायाधीशों के पद लम्बे समय से रिक्त हो, जजों की नियुक्ति प्रक्रिया ‘कालेजियम’ पर स्वयं न्यायाधीशों को आपत्ती हो, फैसलों की कोई समय सीमा न हो, जहां की कार्य पालिका राजनीतिक नेतृत्व को खुश रखने की गरज से काम कर रही हो, उस देश के प्रजातंत्र का भविष्य क्या और कैसा हो सकता है? 

आज ये ही कुछ सवाल है, जो देश के बुद्धिजीवियों की परेशानी के कारण बने हुए है, अब हमारी आजादी के आठ दशक बाद तो हमें अपने इन सवालों के उत्तर खोजने की हर स्तर पर कौशिश होनी चाहिए? यद्यपि यह भी सही है कि देश के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व ने देश की आम जनता को इस कदर उनकी निजी परेशानियों में फंसा रखा है कि इन सब सवालों के उत्तर खोजने का उनके पास समय नही छोड़ा है, किंतु इन लाख परेशानियों के बाद भी देश के हर जागरूक व निष्ठावान नागरिक को इन समस्याओं पर गंभीर चिंतन का समय निकालना पड़ेगा, तभी देश का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा, वर्ना हमारा प्रजातंत्र उसके जन्म का शतक भी पूरा नही कर पाएगा? किसी भी प्रजातांत्रिक देश का अहम और मुख्य हिस्सा वहां की न्याय पालिका होती है और यदि स्वयं न्याय पालिका ही न्याय के लिए मोहताज नजर आए और उसे राजनीतिक नेतृत्व के अधीन काम करने को मजबूर किया जाए? तो फिर ऐसी स्थिति के बारे में क्या कहा जा सकता है?

अब धीरे-धीरे ये सवाल और अधिक गंभीर रूप धारण करते जा रहे है और हमारे कथित लोकतंत्र का ‘चीरहरण’ करते जा रहे है। इसलिए समय रहते इन पर मंथन कर इन सवालों की दिशाहीनता खत्म करना जरूरी है, वर्ना हमारी अगली पीढ़ियां हमें कभी माफ नही करेगी और हम एक ऐसे अनजान चौराहे पर खड़े हो जाएगें जहां कोई सही रास्ता दिखाने वाला भी नही होगा।

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