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घर बैठे गर्भपात की दवा मंगाने की राह हुई मुश्किल

वाशिंगटन । अमेरिकी अदालत ने उन हजारों महिलाओं के रास्ते में अस्थायी बाधा डाल दी है, जो बिना किसी डॉक्टरी सलाह के गर्भपात की गोली, मिफेप्रिस्टोन घर बैठे हासिल कर लेती थी। अदालत के हालिया फैसले के बाद, महिलाएं अपनी मर्ज़ी से अब पर्चे के बिना गर्भपात की यह दवा ऑनलाइन नहीं मंगा सकेंगी। अमेरिका की 26 वर्षीय एक कामकाजी लड़की, ऐसी ही परिस्थितियों से गुज़री थी। पार्टी के बाद अपने एक दोस्त से उसके अनजाने में शारीरिक संबंध बन गए। कुछ हफ़्तों बाद जब उसका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आया, तो उसकी दुनिया हिल गई। उसने सोशल मीडिया पर गर्भपात की गोली खोजी और मिफेप्रिस्टोन के बारे में पढ़ा। बिना किसी डॉक्टर की सलाह के, उसने ऑनलाइन ऑर्डर कर मेल से यह दवा मंगवाई और खा ली। 24 घंटे बाद मिसोप्रोस्टोल भी ली, जिसके बाद कुछ दिनों तक तेज दर्द और ब्लीडिंग हुई, और उसका काम हो गया। रोजी जैसी हज़ारों महिलाएं पिछले कुछ सालों से अमेरिका में गर्भपात का यही तरीका अपना रही थीं। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फिफ्थ सर्किट ने लुयिसियाना राज्य की याचिका पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। 

अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब टेलीहेल्थ या मेल के ज़रिए मिफेप्रिस्टोन नहीं दी जा सकेगी। इसे व्यक्तिगत रूप से (इन-पर्सन) फार्मेसी से प्राप्त करना होगा। अदालत ने कहा कि एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) का नियम राज्य के गर्भपात विरोधी कानूनों का उल्लंघन करता है। मिफेप्रिस्टोन (मिफेप्रेक्स, कोर्लिम या आरयू-486) मेडिकल गर्भपात की मुख्य दवा है। यह प्रोजेस्टेरोन हार्माेन को रोककर गर्भाशय की लाइनिंग को तोड़ देती है। इसे लेने के 24-48 घंटे बाद मिसोप्रोस्टोल ली जाती है, जो गर्भ को बाहर निकालने में सहायता करती है। यह 70 दिनों तक की गर्भावस्था को 99.6 प्रतिशत तक समाप्त करने में सक्षम है। एफडीए ने इसे वर्ष 2000 में मंज़ूरी दी थी और तब से यह काफी सुरक्षित दवा मानी जाती रही है। गर्भपात की इस दवा का इस्तेमाल भारत में भी किया जाता है। दरअसल, वर्ष 2022 में अमेरिका के कई राज्यों में गर्भपात पर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन टेलीहेल्थ और मेल सुविधा के कारण महिलाएं इसे घर बैठे मंगवा लेती थीं। डेमोक्रेटिक राज्यों के शील्ड लॉ ने इसे और भी आसान बना दिया। हालात ये हो गए कि अमेरिका में गर्भपातों की संख्या कम होने के बजाय 60 फीसदी से ज़्यादा बढ़ गई। 

एंटी-अबॉर्शन समूहों का तर्क था कि बिना चिकित्सकीय निगरानी के दवा का इस्तेमाल खतरनाक है। वे शील्ड लॉ को भी खत्म करना चाहते थे, क्योंकि उनका मानना था कि इससे राज्य के कानूनों को नुकसान पहुँच रहा था। हालाँकि, महिलाओं के लिए अदालत का यह आदेश सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि अब हर महिला को इस दवा के लिए शारीरिक रूप से डॉक्टर के पास जाना होगा। गर्भपात अधिकार समूहों का कहना है कि यह महिलाओं की पहुँच को मुश्किल बना रहा है, खासकर दूर-दराज या उन इलाकों में जहाँ गर्भपात पर पहले से प्रतिबंध हैं। इस फैसले के बाद, दवा कंपनी डैंको लैबोरेटरीज ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए समय माँगा है। 

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