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जिन पर सबसे ज्यादा और गंभीर आरोप थे वही बेदाग निकले

लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल गई है। शासन को सौंपी गई रिपोर्ट में दोनों के नाम शामिल नहीं हैं। अब रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेज दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम रिपोर्ट में केवल उन आठ आरोपियों के नाम हैं, जिन्हें मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सबसे ज्यादा आरोप लगे थे। दबाव बढ़ने के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित दूसरी एसआईटी मामले की जांच अभी जारी रखे हुए है।

मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली टीम में आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार शामिल थे। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में चोरी की पुष्टि हुई थी। करीब 80 लाख रुपये की बरामदगी पुलिस को सूचना दिए बिना किए जाने की बात भी सामने आई थी। 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी गई। इसके बाद 25 जून को आठ लोगों के खिलाफ श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया। अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अज्ञात आरोपियों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 बार कर्मचारियों को नकदी छिपाकर ले जाते हुए दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। जांच में ट्रस्ट और बैंक की संयुक्त मानक कार्यप्रणाली का पालन नहीं होने तथा प्रवेश-निकास पर तलाशी की व्यवस्था न होने का भी उल्लेख था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी एसआईटी को जांच तेजी से पूरी कर सही निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। अदालत ने जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है। पीठ ने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद भक्तों के दान के प्रबंधन में सुधार के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। 


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