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सैफ के साथ चाहकर भी वक्त नहीं बिता पाई मां शर्मिला टैगोर

मुंबई । बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। सैफ अली खान का बचपन किसी आम स्टारकिड जैसा नहीं था। पिता मंसूर अली खान पटौदी भारतीय क्रिकेट के बड़े नाम थे और मां शर्मिला टैगोर हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री, लेकिन सैफ के बचपन का एक ऐसा दौर भी रहा, जब उनकी मां चाहकर भी उनके साथ उतना वक्त नहीं बिता पाती थीं, जितना एक मां अपने बच्चे के साथ बिताना चाहती है। 

सैफ के जन्म के बाद के कुछ सालों में शर्मिला अपने करियर के बेहद व्यस्त दौर में थीं। वह दिन में दो-दो शिफ्ट में काम करती थीं। एक शिफ्ट सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक चलती थी। लेकिन शर्मिला यह भी मानती हैं कि सैफ की परवरिश में वह अकेली नहीं थीं। उनके पति मंसूर अली खान पटौदी और आसपास के लोगों ने इस दौरान उनका साथ दिया। इसी दौरान सैफ की जिंदगी में एक ऐसी महिला आईं, जिन्होंने मां की गैरमौजूदगी को काफी हद तक पूरा किया। उनका नाम था सुनीता गोस्वामी। सुनीता सिर्फ सैफ की पड़ोसी ही नहीं थीं, बल्कि वह उनके स्कूल में पढ़ाती भी थीं। शर्मिला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि सुनीता उस समय सैफ के स्कूल ‘सैफी महल’ में टीचर थीं। सुनीता अपने पति जतिन गोस्वामी के साथ सैफ का खूब ख्याल रखती थीं। शर्मिला ने बताया था कि वह सैफ की जिंदगी के जरूरी पड़ावों पर मौजूद रहती थीं, लेकिन बच्चे की रोजमर्रा की जरूरतों और छोटी-छोटी चीजों के लिए वह सुनीता और उनके परिवार की मदद पर काफी निर्भर थीं। इसी वजह से शर्मिला ने सुनीता को सिर्फ पड़ोसी या स्कूल टीचर नहीं माना, बल्कि सैफ की ‘दूसरी मां’ तक कहा।

सैफ अली खान का जन्म भले ही पटौदी के नवाब खानदान में हुआ था, लेकिन फिल्मों में आने से पहले उनकी जिंदगी किसी शाही राजकुमार जैसी नहीं थी। स्कूल खत्म करने के बाद सैफ ने दिल्ली की एक विज्ञापन एजेंसी में करीब दो महीने काम किया। दिलचस्प बात यह थी कि उस वक्त सैफ के पिता मंसूर अली खान पटौदी उन्हें शाही ठाठ-बाट में ऑफिस भेजने के बजाय डीटीसी बस से काम पर जाने देते थे।

 एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सैफ के पिता उन्हें बस से ऑफिस भेजते थे और खर्च के लिए सिर्फ 200 रुपए हफ्ते की पॉकेट मनी देते थे। सैफ अली खान जब दिल्ली में विज्ञापन एजेंसी में काम कर रहे थे। इसी दौरान एक फैमिली फ्रेंड ने उन्हें ‘ग्वालियर सूटिंग्स’ के एक टीवी विज्ञापन में काम करने का सुझाव दिया। सैफ ने विज्ञापन किया। विज्ञापन में सैफ के लुक और व्यक्तित्व ने निर्देशक आनंद महेंद्रू का ध्यान खींचा। उन्होंने सैफ को अपनी फिल्म में मुख्य भूमिका देने का फैसला किया। फिल्म में काम करने का मौका मिलने के बाद उन्होंने दिल्ली छोड़कर मुंबई जाने का फैसला कर लिया। लेकिन मुंबई पहुंचने के बाद पता चला कि फिल्म बन ही नहीं पाई।

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