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किरण बेदी की दूसरी इच्छा

नई दिल्ली । पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी, जिनकी जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शनों को हटाने की मांग पूरी हो चुकी है, अब कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रदर्शनों को संभालने के लिए पुलिस को नए उपाय सुझा रही हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को बेबुनियाद आरोपों से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग की है। पूर्व आईपीएस अधिकारी बेदी का सुझाव है कि पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ काम करने और उनका नेतृत्व करने के लिए बॉडी कैम से लैस महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करे। साथ ही, सभी प्रदर्शनों की सीसीटीवी या अन्य कैमरों के माध्यम से रिकॉर्डिंग होनी चाहिए। उन्होंने फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया, जिससे अधिकारियों के पास समीक्षा के लिए ठोस सबूत मौजूद रहे और गलत आरोप रुक सके। उन्होंने सरकार से उपकरणों की खरीद, प्रशिक्षण और तैनाती के साथ-साथ फुटेज की सुरक्षित समीक्षा के लिए अभी से तैयारी शुरू करने का आग्रह किया।

इसके पहले, पूर्व आईपीएस अधिकारी बेदी ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुपयुक्त बताकर इस शहर के संवेदनशील स्थानों और व्यावसायिक क्षेत्र के करीब होने का हवाला दिया था। उनकी इस मांग पर गृह मंत्रालय ने अब रामलीला मैदान और अन्य स्थानों को इसके लिए चिह्नित किया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी बेदी ने कहा कि रामलीला मैदान जैसी नई जगहों के लिए एक स्पष्ट सुरक्षा और संचालन योजना होनी चाहिए, जिसे प्रदर्शन की अनुमति देते समय स्पष्ट रूप से बताया जाए। उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के मौजूदा ब्रिटिश सिस्टम की आलोचना कर चरणबद्ध रणनीति का प्रस्ताव रखा। इसके तहत, पहली पंक्ति में लाठीरहित सिविल डिफेंस के युवा पुरुष और महिला सदस्य होने चाहिए। यदि भीड़ बेकाबू होती है, तब दूसरी पंक्ति में हेडगियर और बॉडी आर्मर से लैस महिला पुलिसकर्मी होंगी, जिनके पास लाठियां नहीं होंगी। केवल अत्यधिक उग्र स्थिति में ही अंतिम उपाय के तौर पर सशस्त्र पुलिस बल का उपयोग किया जाना चाहिए, जो हालात देखकर बल प्रयोग करेगा। पूर्व आईपीएस अधिकारी का मानना है कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी तैयारी ही सबसे अच्छा बचाव है।


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