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रूस-चीन के साथ खड़ा

वाशिंगटन । हाल ही में एक व्यापक सर्वेक्षण प्रकाशित किया है, जिसमें जी-20 देशों के प्रति अमेरिकी नागरिकों की धारणाओं का खुलासा हुआ है। यह सर्वे तब आया है जब अमेरिका स्वयं दिसंबर में मियामी में आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों ने कई लोगों को हैरान किया है, विशेषकर भारत के प्रति अमेरिकी जनता के दृष्टिकोण को लेकर चौकाने वाली बात सामने आई है। आंकड़ों से पता चला है कि अमेरिकी नागरिकों ने भारत को जी-20 देशों में रूस, चीन और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ निम्न पायदानों पर रखा है, जबकि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे पारंपरिक सहयोगियों को कहीं अधिक प्राथमिकता दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन को अमेरिकियों ने औसतन 100 में से 37 अंक दिए, जबकि रूस को महज 27 अंक मिले, जो सभी जी-20 देशों में सबसे कम था। रूस के प्रति अमेरिकी जनता का रवैया विशेष रूप से बहुत रूखा रहा, जिसमें 51 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इस श्रेणी को चुना। यह चीन के प्रति बहुत ठंडा दृष्टिकोण रखने वाले करीब एक तिहाई लोगों की तुलना में कहीं अधिक है। सऊदी अरब भी उन देशों में शामिल रहा जिसके प्रति अमेरिकी जनता की राय काफी नकारात्मक थी। सर्वेक्षण में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित हुआ कि रूस और चीन अमेरिकी नागरिकों द्वारा प्रमुख खतरों के रूप में देखते हैं।

इसके विपरीत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान और इटली जैसे देशों को अमेरिकी नागरिकों द्वारा सबसे अच्छी रेटिंग मिली। इन देशों का औसत स्कोर 60 से 65 के बीच रहा, जो उनके प्रति सकारात्मक और मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण को दिखाता है। कनाडा को 48 प्रतिशत बहुत गर्म और ऑस्ट्रेलिया को 42 प्रतिशत बहुत गर्म रेटिंग मिली। यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और फ्रांस जैसे अन्य देशों ने अपेक्षाकृत सकारात्मक औसत रेटिंग प्राप्त की, जिससे अमेरिका के पारंपरिक पश्चिमी और कुछ एशियाई सहयोगियों के प्रति मजबूत भावनाएँ परिलक्षित होती हैं।

भारत के लिए सर्वेक्षण के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचने वाले हैं। केवल 9 प्रतिशत अमेरिकियों ने भारत के साथ बहुत मजबूत या बहुत गर्म संबंध महसूस किए, जबकि 19 प्रतिशत ने कुछ हद तक गर्म संबंधों को इंगित किया। वहीं, 15 प्रतिशत अमेरिकियों ने भारत के साथ संबंधों को कुछ हद तक ठंडा बताया और 20 प्रतिशत ने बहुत ठंडा रवैया दिखाया है। यह भारत को उन देशों की श्रेणी में रखता है जिन्हें इंडोनेशिया, अर्जेंटीना और तुर्की के साथ-साथ चीन, रूस और सऊदी अरब के बाद कम सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाता है।

हालांकि, चीन के प्रति अमेरिकी दृष्टिकोण अभी भी समग्र रूप से नकारात्मक बना हुआ है, लेकिन 2021 के बाद से इसकी रेटिंग में थोड़ा सुधार हुआ है। 2021 में औसत 28 से बढ़कर यह 37 हो गई है, संभवतः कुछ राजनयिक प्रयासों या जनता की राय में बदलाव को दर्शाता है। यह सर्वेक्षण इस बात पर प्रकाश डालता है कि अमेरिकी जनता की धारणाएं जटिल हैं और अक्सर भू-राजनीतिक गठबंधनों या रणनीतिक महत्व के साथ पूरी तरह से मेल नहीं खाती हैं, खासकर जब बात भारत जैसे तेजी से महत्वपूर्ण होते राष्ट्र की आती है। यह सर्वे अमेरिका की विदेश नीति निर्माताओं के लिए जन भावना को समझने और उसके अनुसार अपनी रणनीतियों को समायोजित करने के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।


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