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मोहम्मद शमी के टीम से बाहर होने पर मोहम्मद कैफ ने उठाए सवाल

नई दिल्ली । भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को न्यूजीलैंड दौरे के लिए घोषित वनडे और टेस्ट टीम में एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया गया है। उनके लगातार टीम से बाहर रहने पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कैफ ने पारदर्शिता की कमी पर जोर देते हुए पूछा कि जिस तरह जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड को मैनेज किया जाता है, वैसा सलूक शमी के साथ क्यों नहीं किया जाता।

36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने मार्च 2025 के बाद से कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है, और न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए आकाश दीप और अंशुल कंबोज जैसे नए चेहरों की वापसी के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला। एक चर्चा के दौरान, कैफ ने इस मुद्दे पर अपनी बेबाक राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टीम चयन के बाद बीसीसीआई या चयनकर्ताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण नहीं आता, जिससे पारदर्शिता का अभाव साफ झलकता है।

कैफ ने मोहम्मद शमी के महत्व को रेखांकित करते हुए 2023 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन का हवाला दिया। उन्होंने कहा, अगर शमी नहीं होते तो भारत विश्व कप के फाइनल में नहीं पहुंचता। हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के बाद, शमी ने पांचवें गेंदबाज के रूप में शानदार प्रदर्शन किया और पूरे टूर्नामेंट में छठे गेंदबाज की कमी महसूस नहीं होने दी। शमी ने उस विश्व कप में 24 विकेट लिए थे, जिससे रोहित शर्मा की कप्तानी में टीम इंडिया का संतुलन बना रहा था। पूर्व बल्लेबाज ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि शमी को छोटे स्पेल डालने के कारण नहीं चुना जाता। उन्होंने तर्क दिया, टेस्ट मैचों में जसप्रीत बुमराह भी चार ओवर के स्पेल डालते हैं और उन्हें ब्रेक मिलता है। पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर बुमराह के वर्कलोड मैनेजमेंट की बात हुई थी, जहां कप्तान शुभमन गिल ने उन्हें चार-चार ओवर के स्पेल दिए थे। अगर एक गेंदबाज के साथ ऐसा सलूक हो सकता है, तो मोहम्मद शमी के साथ क्यों नहीं? कैफ ने जोर देकर कहा कि छोटे स्पेल डालना कोई बुराई नहीं है और इस पर भी काम किया जा सकता है।

कैफ ने अपनी बात समाप्त करते हुए फिर से पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शमी रणजी ट्रॉफी और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार खेल रहे हैं और विकेट ले रहे हैं, ऐसे में उन्हें टीम में न चुनने का कोई ठोस कारण बीसीसीआई को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए। उनके मुताबिक, चयन प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी कहीं न कहीं खिलाड़ियों के मनोबल को प्रभावित कर सकती है।


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