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ममता के वकील ड्रेस पर बार काउंसिंल प्रमुख की तीखी टिप्पणी

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील की ड्रेस पहनकर पेश होने पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने उनके वकालत करने के वैध लाइसेंस पर संदेह व्यक्त करते हुए आधिकारिक जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि कई फर्जी लोग भी सक्रिय रहते हैं, इसलिए इस मामले की पुष्टि करना आवश्यक है।पूरा मामला 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा से जुड़ी एक जनहित याचिका से शुरू हुआ। ममता बनर्जी वकील के काले कोट और सफेद बैंड में चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की बेंच के सामने पेश हुईं और अपनी पार्टी का पक्ष रखा। बीसीआई चेयरमैन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब वह आरजी कर मामले में सुप्रीम कोर्ट गई थीं, तब वह वकील की वेशभूषा में नहीं थीं, लेकिन इस बार उन्होंने निर्धारित ड्रेस पहनकर कोर्ट में पैरवी की।

इस घटना के बाद बीसीआई ने पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल को पत्र लिखकर दो दिनों के भीतर ममता बनर्जी के कानूनी प्रैक्टिस के दर्जे की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। परिषद ने मुख्य रूप से उनके एनरोलमेंट नंबर, पंजीकरण की तारीख और वर्तमान स्टेटस की जानकारी तलब की है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठाया गया है कि चूंकि ममता बनर्जी 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर रहीं, तो क्या उन्होंने इस अवधि के दौरान नियमों के तहत अपनी प्रैक्टिस निलंबित करने की आधिकारिक सूचना दी थी? शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ममता बनर्जी के पास जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून (एलएलबी) की डिग्री है। हालांकि, बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, किसी भी लाभकारी या संवैधानिक पद पर रहने के दौरान वकालत का लाइसेंस निलंबित रखना अनिवार्य होता है। वर्तमान में बीसीआई इस बात की जांच कर रहा है कि क्या एक दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के बाद, बिना प्रक्रिया पूरी किए उनका सीधे वकील के रूप में कोर्ट में पेश होना वैध है या नहीं। राज्य बार काउंसिल की रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति साफ होगी।

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