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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बोले- जनता के गुस्से का नतीजा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस के मृत कार्यकर्ता के परिजन से मिलने जा रहीं ममता बनर्जी के काफिले के विरोध को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को दावा किया कि विरोध प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी के किसी कार्यकर्ता ने नहीं किया, बल्कि यह जनता के भारी गुस्से का नतीजा था। उन्होंने कहा कि मौके पर न तो भाजपा का कोई कार्यकर्ता मौजूद था और न ही पार्टी का झंडा दिखाई दिया। हलीशहर जाते समय प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के वाहन को घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर कीचड़, जूते और पत्थर भी फेंके। ममता बनर्जी उस तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं, जिसकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हुई थी।

शुभेंदु अधिकारी ने घटना में भाजपा की किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करते हुए ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी है और इसी वजह से उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। अधिकारी ने आरजी कर मामले की पीड़िता को लेकर भी ममता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ममता को पीड़िता के परिवार से मिलकर माफी मांगनी चाहिए थी। अधिकारी ने कहा कि पीड़िता की मां हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने ममता बनर्जी से सवाल किया कि वह पीड़िता की दूसरी बरसी पर उसके परिवार से मिलने क्यों नहीं गईं। ममता बनर्जी ने अपने काफिले पर हुए विरोध के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवंगत तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार को भाजपा समर्थकों की ओर से धमकाया जा रहा था।

ममता ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने ममता बनर्जी के काफिले पर कथित हमले की निंदा की। उन्होंने भाजपा पर राज्य में अराजकता और भय का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया और इसे बदले की राजनीति का गंभीर उदाहरण बताया। घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां भाजपा इसे जनता के आक्रोश से जोड़ रही है, वहीं ममता बनर्जी और विपक्षी दल इसे राजनीतिक हिंसा और बदले की कार्रवाई बता रहे हैं।


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