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नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 विधायकों की बगावत

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार के सामने एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। हाल ही में परिणय सूत्र में बंधे मुख्यमंत्री को शादी की खुशियों के बीच अपनी ही पार्टी के भीतर से तगड़ा झटका मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के लगभग 25 विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत करने की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे राजभवन जाकर औपचारिक रूप से सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे। हालांकि, पार्टी के कई नेता इन अटकलों को खारिज भी कर रहे हैं।

यह असंतोष मुख्य रूप से हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सामने आया है, जिसमें कुछ खास विधायकों को मंत्री बनाए जाने से कई वरिष्ठ विधायक और छह बार के विधायक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जैसे नेता नाराज चल रहे हैं। नाराज विधायकों की प्रमुख मांगों में मौजूदा सभी मंत्रियों को हटाना, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार को बदलना, निष्पक्ष तरीके से नई मंत्रिपरिषद का गठन और मंत्री पद पर नियुक्ति से पहले विधायक दल की बैठक आयोजित करना शामिल है। इसके अलावा, आर्टिकल 370 और 35ए की बहाली पर जोर देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।

नाराजगी सिर्फ विधायकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी भी सरकार और पार्टी के रुख से बेहद खफा हैं। उनका आरोप है कि सरकार अनुच्छेद 370 की बहाली और कैदियों की रिहाई जैसे अपने मुख्य चुनावी वादों से पीछे हट गई है। उन्होंने पार्टी के भीतर इन नीतियों के विरोध में अपना सांसद पद और पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए 3 नवंबर की तारीख तय की है। रुहुल्लाह का कहना है कि वे इस राजनीतिक धोखे और अपमान का हिस्सा नहीं बनना चाहते। 90 विधानसभा सीटों वाले जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास अपने कुल 41 विधायक हैं। सरकार को बचाने के लिए गठबंधन सहयोगियों का साथ जरूरी है, ऐसे में 25 विधायकों की कथित नाराजगी और बगावत की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, कुछ पार्टी विधायकों ने इन बैठकों और बगावत की खबरों को खारिज करते हुए पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी पूर्ण निष्ठा व्यक्त की है और कहा है कि वे पार्टी को कमजोर नहीं होने देंगे। बहरहाल, अंदरूनी कलह और अल्टीमेटम के इस दौर के बीच उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए आने वाले दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।


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