Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

यूएन में भारत की सदस्यता पर चीन हुआ तटस्थ

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की अस्थायी सदस्यता की दावेदारी पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2028-29 की अवधि के लिए यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक कार्यक्रम में की थी। इस अभियान के बाद चीन, जो स्वयं वीटो अधिकार प्राप्त स्थायी सदस्य है, ने कहा है कि वह भारत की दावेदारी से जुड़ी खबरों पर गौर कर रहा है। हालांकि, चीन ने अब तक भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं किया है, जिससे पड़ोसी मुल्क का रुख स्पष्ट नहीं हो पाया है।

इसके विपरीत, सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से अन्य चार देश दृ अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस दृ पहले ही सुधार के बाद गठित होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट रूप से समर्थन कर चुके हैं। यह चीन के तटस्थ रुख के विपरीत भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण शांति अर्थात मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिये समग्र प्रगति सुनिश्चित करने पर आधारित है। उन्होंने अपने संभावित कार्यकाल में भारत की प्राथमिकताओं का भी विस्तार से उल्लेख किया। सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे, जिसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा।

भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था, जो 15 सदस्यीय इस शक्तिशाली निकाय में उसका आठवां कार्यकाल था। भारत का तर्क है कि यूएनएससी का मौजूदा, लगभग 80 साल पुराना ढांचा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उपयुक्त नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि इसी अक्षमता के कारण यह वैश्विक संस्था दुनिया भर में जारी संघर्षों से हो रही मानवीय पीड़ा को प्रभावी ढंग से खत्म करने में विफल रही है। भारत ने विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में भी बदलाव की वकालत की है। स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने हाल ही में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की नकारात्मक धारणा की मुख्य वजह सुरक्षा परिषद की विभिन्न संघर्षों में प्रभावी हस्तक्षेप करने में विफलता है।


Comments (0)

Leave a Comment