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सीजेपी में घमासान

नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर एक महीने से जारी प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के प्रवक्ता विजेता दहिया को बर्गर विवाद के बाद पद से हटा दिया गया है। दहिया ने खुलासा किया है कि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उनसे खुद इस्तीफा देने को कहा था, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर पद छोड़ने से इनकार कर दिया और पार्टी को उन्हें बर्खास्त करने की चुनौती दी।

20 जुलाई को सीजेपी द्वारा आयोजित संसद मार्च के दौरान यह पूरा विवाद शुरू हुआ। मार्च के दौरान हजारों कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे, लेकिन सुबह के समय दिखे विजेता दहिया अचानक मुख्य प्रदर्शन स्थल से गायब हो गए। इसके कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें दहिया एक फास्ट फूड आउटलेट में बर्गर खाते हुए दिखे। वहीं पास के एक मेट्रो स्टेशन पर कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और सवाल उठाया कि जब प्रदर्शनकारी छात्र सड़कों पर पुलिस की लाठियों का सामना कर रहे हैं, तब वे वहां क्या कर रहे हैं। दहिया ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वह भूख लगने पर कुछ खाने गए थे और नहाने के लिए घर लौट रहे थे। इस घटना के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दहिया को फोन कर आंदोलन से दूर रहने और प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने का निर्देश दिया। दहिया के अनुसार, दीपके ने उनसे कहा कि अब आंदोलन में उनकी जरूरत नहीं है और इस्तीफा देना ही संगठन के हित में होगा। हालांकि, दहिया ने तर्क दिया कि विरोधी गुट आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और पार्टी को उनके आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए। जब दहिया ने यह कहते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगा, भले ही आप मुझे निकाल दें, तो इसके बाद सीजेपी नेतृत्व ने उन्हें आधिकारिक तौर पर प्रवक्ता पद से हटाने की घोषणा कर दी। दहिया ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि आंदोलन की रक्षा करने के बावजूद उन्हें अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

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