Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

संजौली में तड़के भूस्खलन से दहशत में लोग

प्रभावित परिवारों ने मांगी सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था, निजी निर्माण कार्य पर उठे सवाल

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में शनिवार तड़के हुए भूस्खलन से इलाके में दहशत फैल गई। सुबह करीब चार बजे संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में अचानक पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसक गया, जिससे मलबा नीचे स्थित कई रिहायशी मकानों तक पहुंच गया। घटना के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की फिलहाल सूचना नहीं है, हालांकि भूस्खलन से तीन से चार मकानों पर गंभीर खतरे का अंदेशा जताया जा रहा है। भूस्खलन के बाद लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए और बारिश के बीच खुले में खड़े होकर प्रशासनिक सहायता का इंतजार करते रहे। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों ने बताया है, कि सूचना देने के काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर प्रभावित परिवारों को मकान खाली करने की सलाह दी। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक ठिकाना नहीं है, जिससे वे असमंजस और भय के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। 

सपोर्टिंग दीवार ढही 

भूस्खलन के कारण संजौली कॉलेज जाने वाले मार्ग के नीचे बनी सपोर्टिंग दीवार (ढंगा) भी ढह गई। इसके चलते मलबा नीचे की ओर बह गया और मकानों तक पहुंचने वाला रास्ता बीच से टूट गया, जिससे क्षेत्र में आवाजाही बाधित हो गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल 

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सुबह से पार्षद, विधायक, मेयर और अन्य जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया और न ही कोई मौके पर पहुंचा। लोगों ने तत्काल राहत, सुरक्षित आवास और प्रभावित क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग की है। 

भूस्खलन की वजह बनी पहाड़ी की खुदाई?  

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में एक निजी निर्माण परियोजना के लिए पहाड़ी की खुदाई की गई थी। लगातार बारिश के कारण खुदाई वाला हिस्सा कमजोर हो गया और इसी वजह से भूस्खलन हुआ। उन्होंने निर्माण कार्य तत्काल रोकने तथा पूरे क्षेत्र का विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मानसून की अभी शुरुआत हुई है और यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है। उल्लेखनीय है कि 28 जून 2025 को भी इसी क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन में कई मकानों में मलबा घुस गया था और बच्चे व महिलाएं घरों में फंस गए थे।

Comments (0)

Leave a Comment