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संक्रमित पानी मे मिलता है ये खतरनाक जीव

नई दिल्ली। कई लोगों को झीलों, तालाबों, नदियों में तैरने का शौक होता है। ऐसे जल स्रोतों में एक दुर्लभ और खतरनाक सूक्ष्मजीव नेगलेरिया फाउलेरी भी मौजूद हो सकता है। यूं तो इस खतरनाक जीव का संक्रमण बेहद दुर्लभ होता है, लेकिन यदि यह शरीर में प्रवेश कर जाए तो गंभीर मस्तिष्क संक्रमण का कारण बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि इसके बारे में सही जानकारी और सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है। नेगलेरिया फाउलेरी एक सूक्ष्म अमीबा है, जो सामान्यतः गर्म मीठे पानी जैसे झीलों, तालाबों, नदियों, गर्म पानी के झरनों और ठीक से साफ-सफाई न किए गए स्विमिंग पूलों में पाया जाता है। यह खारे समुद्री पानी में सामान्य रूप से नहीं मिलता। यह संक्रमण दूषित पानी पीने से नहीं फैलता, बल्कि तब होता है जब संक्रमित पानी नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।

 इसके बाद यह सूंघने वाली नस (ऑलफैक्टरी नर्व) के जरिए मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (पीएएम) नामक गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, झीलों और तालाबों में तैरने वाले लोग, पानी में गोता लगाने वाले बच्चे और युवा, वॉटर स्पोर्ट्स में भाग लेने वाले व्यक्ति तथा ऐसे स्थानों पर जाने वाले लोग जहां पानी की स्वच्छता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता, उनके लिए संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। हालांकि यह बीमारी अत्यंत दुर्लभ है और अधिकांश लोगों को इसका संक्रमण नहीं होता। संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में तेज सिरदर्द, बुखार, मतली, उल्टी और गर्दन में अकड़न शामिल हो सकते हैं। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, भ्रम की स्थिति, मानसिक बदलाव, दौरे पड़ना और शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। 

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है, विशेषकर यदि हाल ही में किसी गर्म मीठे पानी के स्रोत में तैराकी की गई हो। बचाव के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्म मीठे पानी की झीलों या तालाबों में तैरते समय नाक में पानी जाने से बचें और आवश्यकता होने पर नोज क्लिप का उपयोग करें। गंदे या संदिग्ध जल स्रोतों में गोता लगाने से बचना चाहिए। स्विमिंग पूल का उपयोग केवल तभी करें जब उसकी नियमित सफाई और क्लोरीनीकरण किया जाता हो। इसके अलावा नाक की सफाई के लिए केवल उबला और ठंडा किया हुआ, स्टरलाइज्ड या डिस्टिल्ड पानी ही इस्तेमाल करना चाहिए


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