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अरब वर्ल्ड में शिया और सुन्नी के बीच बन रहे संघर्ष के आसार

न्यूयार्क। अरब वर्ल्ड में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्ध की आशंका से दुनिया पहले ही सहमी हुई थी, लेकिन अब हूती विद्रोहियों की एंट्री ने इस चिंता को और गहरा दिया है। यह पूरा मामला तेजी से अरब वर्ल्ड में शिया बनाम सुन्नी संघर्ष का रूप लेता दिख रहा है। पिछले एक हफ्ते से यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब को लगातार निशाना बना रहे हैं, जिससे सऊदी अरब दोहरे धोखे का शिकार महसूस कर रहा है। पहले उसे पाकिस्तान से मदद नहीं मिली, जिसने मक्का समझौते के बावजूद हाथ खींच लिए, और अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से भी कथित धोखा मिला है।अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ एक सीक्रेट डील कर ली है। इस समझौते के तहत, हूती विद्रोहियों ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वे लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। बदले में, अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य मदद नहीं करेगा। 

हालांकि, इस डील में हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे लाल सागर में सऊदी के कार्गाे शिप और ऑयल टैंकरों को निशाना बनाते रहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों और हूती विद्रोहियों के बीच यह गुप्त डील पिछले हफ्ते ओमान की राजधानी मस्कट में हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की कि अमेरिका की हूती विद्रोहियों के साथ सीधी बातचीत हुई है और अपने हितों की रक्षा के लिए अमेरिका ऐसा करता रहेगा। हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों से सऊदी अरब के टैंक और सैन्य ठिकाने तबाह हो रहे हैं। इन हमलों से दुनिया पर महंगाई बम फटने का खतरा भी बढ़ गया है, क्योंकि हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास नाकेबंदी कर ली है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही ईरान के नियंत्रण में है। यदि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद होता है, तो यूरोप और एशिया के बीच व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे कच्चे तेल सहित अन्य सामान की लागत में भारी वृद्धि होगी और वैश्विक महंगाई कई गुना बढ़ सकती है। यह शिया-सुन्नी संघर्ष पैगंबर मोहम्मद के बाद उनके उत्तराधिकारी को चुनने के सैकड़ों साल पुराने विवाद से जुड़ा है, जहाँ सुन्नी समुदाय अबू बक्र को और शिया समुदाय हजरत अली को नेता मानता है। ईरान, इराक का बड़ा हिस्सा, लेबनान का एक हिस्सा और यमन के हूती नियंत्रित इलाके में शिया मुसलमानों का वर्चस्व है, जबकि सऊदी अरब, जॉर्डन, कतर, बहरीन, यूएई, सीरिया, कुवैत, ओमान और तुर्की जैसे देशों में सुन्नी समुदाय का वर्चस्व है। बाब अल-मंदेब और होर्मुज के बंद होने से जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी किनारे केप ऑफ गुड होप से होकर जाना पड़ेगा, जिससे यात्रा 7 हजार किलोमीटर लंबी और 25-30 दिन अधिक हो जाएगी। इससे ईंधन और शिपिंग का खर्चा काफी बढ़ जाएगा, और भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल व अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होंगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।


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