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बांग्लादेश पर चढ़ा चीन की यारी का रंग

रहमान के भारत आने पर अटकलें

नई दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स समूह की बैठक से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित अनुपस्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह घटनाक्रम शेख हसीना के प्रत्यर्पण और तीस्ता नदी जैसे मुद्दों पर भारत-बांग्लादेश के बीच चल रहे तनाव तथा बांग्लादेश में बढ़ते चीनी दखल के बीच सामने आया है। भारत ने प्रधानमंत्री रहमान को ब्रिक्स सहित विभिन्न शिखर सम्मेलनों के लिए दो बार न्योता भेजा है।

हाल ही में, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान ने पत्रकारों के ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी से जुड़े सवाल पर चुप्पी साध ली। उन्होंने खुद को महासभा के अध्यक्ष के रूप में संबोधित करने का अनुरोध करते हुए द्विपक्षीय मुद्दों पर अलग से बात करने की पेशकश की, जिससे उनकी संभावित अनुपस्थिति की अटकलों को और बल मिला। भारत ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए भी रहमान को आमंत्रित किया है, जिसमें भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमा, नेपाल और भूटान सदस्य हैं, लेकिन भारत की ओर से भी रहमान के आने की पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले भी, प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने भारत का न्योता टाल दिया था और तब उनके चीन दौरे की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, बाद में उन्होंने म्यांमार और बीजिंग का दौरा किया। यह भी देखा जा रहा है कि बांग्लादेश एक ओर भारत के सामने विभिन्न शर्तें रख रहा है, वहीं दूसरी ओर डीजल आपूर्ति जैसी मदद भी मांग रहा है। अगस्त में, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री को भारत यात्रा की कोई जल्दी नहीं है और ऐसी यात्रा के लिए अनुकूल माहौल की आवश्यकता होगी, जो राष्ट्रीय हितों पर आधारित हो।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में रहने और उनके प्रत्यर्पण की मांग भी तनाव का एक प्रमुख कारण है। 2024 के छात्र आंदोलन के बाद हसीना भारत आ गई थीं, और 2026 में रहमान सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई है। हाल ही में एक मंत्री ने तो उन्हें वापस लाकर फांसी देने तक की बात कह दी थी, हालांकि सरकार ने बाद में कानूनी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का बयान दिया। प्रत्यर्पण के मुद्दे पर तब और तनाव बढ़ा जब हसीना ने भारत में रहते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिस पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई। भारत ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से उसका कोई लेना-देना नहीं था। बांग्लादेश का चीन के साथ बढ़ता तालमेल भी चिंता का विषय है। जून में, प्रधानमंत्री रहमान ने चीन का दौरा किया था, जहां निवेश और कई द्विपक्षीय समझौते हुए। बांग्लादेश ने चीन से तीस्ता नदी मुद्दे पर मदद मांगी और मोंगला पोर्ट पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) स्थापित करने पर भी चर्चा हुई, जिसे भारत बारीकी से देख रहा है।


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