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टीएमसी नेता ने चुनाव लड़ने से किया इनकार कहा- दीदी खुद लड़ें

कोलकाता।  पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम उपचुनाव अब और भी रोचक होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता अबु ताहिर ने साफ कर दिया है कि वह उपचुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को ही नंदीग्राम से मैदान में उतरने का सुझाव दिया है। गौरतलब है कि साल 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी सुप्रीमो को नंदीग्राम से हार का सामना करना पड़ा था। तब उन्हें वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हराया था। अब इस सीट पर 6 अक्तूबर को मतदान होने जा रहा है, और नतीजों का ऐलान 9 अक्तूबर को होगा।

अबु ताहिर के बयान ने पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को उजागर कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ममता बनर्जी को नंदीग्राम उपचुनाव में आकर चुनाव लड़ना चाहिए। जब तृणमूल सत्ता में थी, तब वह चुनाव लड़ने के लिए आई थीं। अब मैं चुनाव क्यों लड़ूं? ताहिर ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि टीएमसी के सत्ता में रहने के 15 वर्षों के दौरान उन्हें कभी भी उम्मीदवार नहीं माना गया, बल्कि उन्हें अयोग्य समझा गया। उन्होंने कहा, फिर अब मुझे बलि का बकरा बनाने के लिए क्यों चुना जाना चाहिए? उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर उनसे चुनाव लड़ने के बारे में राय ली जाती है, तो वह साफ इनकार कर देंगे। ताहिर का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के दूसरे गुट, जिसकी अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, ने भी ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी को ही उपचुनाव लड़ने की चुनौती दी है।

इस गुट के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने ताहिर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अबू ताहिर सही हैं और उन्हें अब चुनाव क्यों लड़ना चाहिए। दत्ता ने कहा कि यदि ममता बनर्जी चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं हैं, तो उनके भतीजे और सभी कुछ जानने वाले राजनीतिज्ञ अभिषेक को ही चुनाव लड़ जाना चाहिए। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के बंगाल में बढ़ते प्रभाव और टीएमसी में टूट देखते हुए ममता बनर्जी को ही मैदान में उतरना चाहिए। नेताओं का तर्क है कि विधायक बनकर ममता लोगों के मुद्दे उठा सकती हैं और नेता प्रतिपक्ष के रूप में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, इसे लेकर उन्होंने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। अटकलें यह भी हैं कि टीएमसी वरिष्ठ नेता अखिली गिरी पर दांव खेल सकती है। दूसरी ओर, हाल ही में मजिस्ट्रेट द्वारा बुलाई गई एक बैठक में लगभग सभी दल मौजूद थे, जबकि टीएमसी नदारद रही। इस कदम को पार्टी द्वारा उम्मीदवार नहीं मिल पाने की समस्या से जोड़कर देखा जाने लगा था। पार्टी को नंदीग्राम में दो बार हार का सामना करना पड़ा है। साल 2021 में ममता बनर्जी खुद यहां से 1956 वोटों से हारी थीं, जबकि एक अन्य चुनाव में पार्टी के नेता पवित्र कर भी 9 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित हुए थे। दोनों ही मौकों पर शुभेंदु अधिकारी ही विजेता रहे थे। 

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