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बचपन के कोच को कुलदीप की टीम में वापसी का भरोसा

मुम्बई। स्पिनर कुलदीप यादव के बचपन के कोच कपिल पांडे ने कहा है कि इंग्लैंड दौरे में अवसर नहीं मिलने से कुलदीप निराश नहीं है और उसका मनोबल जरा भी कम नहीं हुआ है। कोच के अनुसार टीम चयन का अधिकार कप्तान और कोच का रहता है और ऐसे में कोई भी खिलाड़ी कुछ नहीं कर सकता। केवल अपनी ओर से प्रयास भर कर सकता है। कोच के अनुसार कुलदीप बेहद जुझारू हैं और वह टीम में जरुर वापसी करेगा। ये भी कहा देखा गया है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम ने 104 मैच खेले हैं पर कुलदीप इनमें से केवल 38 अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही खेल पाए हैं। इसके बाद से ही गंभीर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं पर कुलदीप के कोच का कहना है कि टीम चुनना कप्तान और कोच का काम है। पांडे ने स्पष्ट किया, कुलदीप के निराश होने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने अच्छी तैयारी की है और जब भी उन्हें मौका मिला है, उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पांडे के लिए, कुलदीप का भारतीय टीम का हिस्सा बने रहना ही गर्व की बात है। उन्होंने कहा, जब टीम हारती है तो हमेशा दुख होता है पर सबसे बड़ी बात भारतीय टीम का हिस्सा बने रहना है। देश के लिए खेलना गर्व की बात है।

उकके अनुसार कुलदीप अब भी प्रमुख स्पिनर बने हुए हैं और जब भी उन्हें मौका मिलेगा, वे तुरंत अपना प्रभाव दिखाएंगे। पांडे ने इस बात को भी गलत बताया कि कुलदीप के कम टेस्ट मैच खेलने से उनकी योग्यता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि असल मायने में उनका मैच जिताने वाला प्रभाव मायने रखता है। कुलदीप ने अपने डेब्यू के बाद साढ़े नौ साल में केवल 18 टेस्ट मैच खेले हैं। पांडे ने इस पर जोर देते हुए कहा, बात यह नहीं है कि उन्होंने कितने टेस्ट खेले हैं, बल्कि यह है कि उन मैचों में उन्होंने कैसा असर डाला है। जब भी कुलदीप खेले हैं, उन्होंने भारत को जीत दिलाने में मदद की है। साल 2024 में घर पर इंग्लैंड के खिलाफ भारत की जीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। वह एक जबरदस्त प्रतिस्पर्धी हैं। उन्होंने आगे कहा कि कुलदीप के एकदिवसीय रिकॉर्ड से हमेशा पता चला है कि जब उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है, तो वह शानदार प्रदर्शन करते हैं, चाहे उन्होंने कितने भी मैच खेले हों।

पांडे ने यह भी बताया कि कुलदीप की बल्लेबाजी में हुए सुधार पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने कहा, अगर आप कुलदीप की बल्लेबाजी देखें, तो उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए एक शतक और कई अर्धशतक लगाए हैं। उन्होंने अपने खेल के इस पहलू पर भी कड़ी मेहनत की है। कोच ने यह भी बताया कि एक स्थापित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने के बावजूद कुलदीप की काम करने की लगन में कोई बदलाव नहीं आया है। कोच ने कहा, चाहे आईपीएल के बाद हो या किसी अंतरराष्ट्रीय सीरीज के बाद, वह सीधे कानपुर में हमारी अकादमी में वापस आते हैं। विदेश दौरों से पहले भी वह यहीं ट्रेनिंग करते हैं और अभ्यास मैच खेलते हैं। क्रिकेट सिर्फ एक दिन या एक सीरीज का खेल नहीं है। आपको लगातार मेहनत करते रहना पड़ता है। उन्होंने हमेशा कुलदीप को याद दिलाया है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौके बहुत कीमती होते हैं और उन्हें दोनों हाथों से भुनाना चाहिए। पांडे ने कहा कि स्पिनर की सबसे बड़ी ताकत उनकी हिम्मत और कभी हार न मानने का जज्बा है। पांडे को भरोसा है कि कुलदीप की मेहनत का फल उन्हें भारत की ओर से लंबे समय तक खेलने के रुप में मिलेगा। 

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