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एक भी शतक लगाये बिना टेस्ट क्रिकेट में 2000 से अधिक रन बनाये

मुम्बई । भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान अपने दौर के एक बेहतरीन बल्लेबाज रहे है। महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर के साथ सलामी जोड़ीदार के तौर पर उन्होंने कई बड़े साझेदारियां बनायी हैं। वह बदकिस्मती से एक भी शतक नहीं लगा पाये पर इसके बाद भी उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 2000 से अधिक रन है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चेतन ने अपनी क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने भारत के लिए 40 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 2084 रन बनाए, जबकि 7 एकदिवसीय मैचों में 153 रन बनाये। उनकी बल्लेबाजी की अनूठी बात यह थी कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कभी शतक नहीं लगा पाए। कई मौकों पर वह शतक के बेहद करीब आकर भी पूरा नहीं कर पाये। वह 9 बार 80 से 97 के बीच के स्कोर पर आउट हुए। वह टेस्ट क्रिकेट में बिना शतक लगाए 2000 रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने, ये अपने आप में एक अनोखा और अविश्वसनीय रिकॉर्ड था। इस बल्लेबाज ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 179 मैच खेले और 40 की प्रभावशाली औसत से 11,143 रन बनाए, जिसमें 21 शानदार शतक और 59 अर्धशतक शामिल थे। घरेलू सर्किट में उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर उन्हें 1978 में भारतीय टीम में जगह मिली जहां वह गावस्कर के सलामी जोड़ीदार के तौर पर उतरे। 

इस बल्लेबज ने साल 1981 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपने साथी सलामी बल्लेबाज और तत्कालीन कप्तान सुनील गावस्कर को पांच साल के प्रतिबंध से भी बचाया था। अगर वह नहीं बचाते तो गावस्कर का करियर समाप्त होना तय था। हालांकि उनको उस घटना के लिए याद किया जाता है जो 1981 में मेलबर्न क्रिकेट मैदान पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए टेस्ट मैच के दौरान हुई थी। ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज डेनिस लिली की एक गेंद पर अंपायर ने गावस्कर को एलबीडब्ल्यू आउट करार दे दिया। गावस्कर अंपायर के इस फैसले से इतने नाराज़ और असहमत थे कि उन्होंने मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई और गावस्कर गुस्से में अपने सलामी जोड़ीदार चेतन चौहान का हाथ पकड़कर मैदान से बाहर जाने लगे, मानो वह मैच का बहिष्कार करना चाहते हों। यह एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटना बन सकती थी, जिससे भारतीय क्रिकेट की छवि को भारी नुकसान पहुंच सकता था। इसी समय पर चौहान ने असाधारण सूझबूझ और शांतचित्तता का परिचय दिया। उन्होंने गावस्कर के गुस्से को शांत करने का प्रयास किया और साथ ही टीम इंडिया के तत्कालीन मैनेजर शाहिद अली खान दुर्रानी को मैदान की तरफ आने के संकेत किये। दुर्रानी के समझाने-बुझाने के बाद ही गावस्कर शांत हुए और मामला सुलझा। वहीं अगर चेतन चौहान ने उस समय इतनी बुद्धिमत्ता और धैर्य न दिखाया होता और गावस्कर को मैदान से बाहर जाने दिया होता, तो उनके इस गंभीर व्यवहार के लिए गावस्कर पर कम से कम पांच साल का प्रतिबंध लग सकता था, जो उनके शानदार करियर को समय से पहले ही समाप्त कर देता।


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