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होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब पर नाकेबंदी का खतरा

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण दुनिया पहले से ही गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से बदला लेने के लिए लाल सागर के रणनीतिक मार्ग बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया है। हूतियों का कहना है कि यह कदम सऊदी अरब द्वारा यमन के सना हवाई अड्डे पर किए गए हमलों और वर्षों से जारी नाकेबंदी के जवाब में उठाया जा रहा है। यदि यह जलमार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आ सकता है।

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यह होर्मुज के बाद तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। आमतौर पर दुनिया के कुल तेल शिपमेंट का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते सऊदी अरब अपना अधिकांश तेल निर्यात होर्मुज के बजाय ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर तक पहुंचाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेज रहा था। ऐसे में लाल सागर मार्ग बाधित होने से सऊदी अरब के ईंधन निर्यात पर बहुत गहरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हूती विद्रोही इस नाकेबंदी को लागू करने में कामयाब होते हैं, तो समुद्री परिवहन और वैश्विक व्यापार के लिए स्थितियां बेहद गंभीर हो जाएंगी। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही कुल वैश्विक तेल प्रवाह के 20 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है और वहां आपूर्ति बाधित है। यदि बाब-अल-मंदेब का 10 प्रतिशत हिस्सा भी बंद हो जाता है, तो विश्व स्तर पर कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत प्रवाह पूरी तरह ठप हो सकता है। गाजा संघर्ष के दौरान भी हूतियों ने इस क्षेत्र में लगभग 100 वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। अब नई धमकियों के बाद लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को लेकर जहाजरानी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय समुदायों की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं, जिससे ईंधन संकट और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।


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