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इमरान खान ने मुनीर को ही दे दी मात

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान को सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) में चिकित्सा जांच के बाद रावलपिंडी की अडियाला जेल वापस भेज दिया गया है। इमरान खान के एक करीबी सहयोगी डॉ. सलमान अहमद ने कहा कि खान पाक सेना प्रमुख के जाल में फंसने वालों में नहीं हैं और उन्होंने खुद ही अपनी जांच कराने के बाद फौरन अस्पताल वापस जाना चुना है।

डॉ. सलमान अहमद ने दावा किया है कि इमरान खान ने मेडिकल जांच के बाद तुरंत वापस अदियाला जेल जाकर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को राजनीतिक रूप से चेकमेट यानी मात दे दी है। उन्होंने इस बारे में बताया कि दरअसल, खान नहीं चाहते थे कि अस्पताल जाने की घटना को सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तरफ से दी गई कोई रियायत या सेना के साथ किसी गुप्त समझौते के सबूत के तौर पर दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि इमरान खान ने शिफा इंटरनेशनल जाकर वहां एक महीने तक रहने से इनकार कर दिया, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, क्योंकि उन्हें लगता है कि एक कैदी के तौर पर मेडिकल जांच करवाना और अपने परिवार व बेटों से मिलना उनका अधिकार है।अहमद ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का मानना था कि अस्पताल जाने की घटना का सेना राजनीतिक इस्तेमाल कर सकती है। अहमद ने कहा, एक तरह से, मुझे लगता है कि खान साहब ने आसिम मुनीर को चेकमेट कर दिया। मुनीर दुनिया को यह दिखाना चाहते थे कि वह बहुत अच्छे इंसान हैं और खान साहब की परवाह करते हैं, और खान नहीं चाहते थे कि ऐसा प्रचार हो कि उन्होंने कोई समझौता किया है।

उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर इमरान खान को नवाज शरीफ समझने की भूल कर बैठे लेकिन इमरान खान ने उनके प्लान पर ही पानी फेर दिया। सलमान अहमद ने पाकिस्तान के अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों, विशेष रूप से नवाज शरीफ की तुलना करते हुए कहा कि अतीत में नेताओं ने बाहर निकलने या निर्वासन के लिए समझौते किए हैं, लेकिन इमरान खान देश छोड़कर नहीं जाएंगे। खान का मानना है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले राजनीति से प्रेरित और झूठे हैं और वे अदालत में कानूनी लड़ाई लड़कर खुद को निर्दाेष साबित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि खान की यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि संस्थागत सुधारों, कानून के शासन और लोकतांत्रिक नागरिक सर्वाेच्चता की स्थापना के लिए है। उनका मानना है कि भारत की तरह ही यहाँ भी कानून का शासन, लोकतंत्र और नागरिक सर्वाेच्चता होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, मुझे तो कभी भारतीय सेना प्रमुख का नाम भी पता नहीं चला। इमरान खान कह रहे हैं कि हमें आगे बढ़ना होगा; यह व्यक्तियों के बारे में नहीं, बल्कि संस्थाओं के बारे में है। वह लोकतांत्रिक शासन चाहते हैं।


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