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ऑटो सेक्टर में उत्सव का माहौल

चुनौतियों से इनकार नहीं 

 नई दिल्ली । देश का यात्री वाहन उद्योग त्योहारी सीजन के लिए कमर कस चुका है। रिकॉर्ड बुकिंग और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माता उत्पादन बढ़ा रहे हैं, डीलरों के पास स्टॉक जमा कर रहे हैं और नए मॉडल उतारने की तैयारी में हैं। हालांकि, इस उत्साह के बीच कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने का डर सता रहा है, जिसकी वजह पिछले साल के जीएसटी लागू होने के बाद की उच्च बिक्री तुलना है। कमोडिटी की बढ़ती कीमतें और डीलरों के पास बढ़ता स्टॉक भी अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 74.3 प्रतिशत डीलरों को बिक्री में वृद्धि की उम्मीद है, जो जुलाई से पहले के 51.24 प्रतिशत से काफी अधिक है। त्योहारी सीजन के लिए तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है, और यात्री वाहनों के 53.57 प्रतिशत डीलरों ने बुकिंग में बढ़ोतरी दर्ज की है। आपूर्ति की रुकावटों को दूर कर और नए मॉडल लाने की तैयारी कर कंपनियां इस मांग को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सांख्यिकीय आंकड़े भी इस तेजी की पुष्टि करते हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के अनुसार; जुलाई में यात्री वाहनों का उत्पादन सालाना आधार पर 26.4 प्रतिशत बढ़कर 5,05,520 इकाई हो गया, जबकि थोक आपूर्ति 34.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 4,57,810 वाहनों तक पहुंच गई। अप्रैल-जून तिमाही में भी उत्पादन और थोक आपूर्ति में क्रमशः 16.8 प्रतिशत और 25.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखी गई। खुदरा बिक्री भी मजबूत बनी हुई है; फाडा के अनुसार, जुलाई में खुदरा पंजीकरण में 19.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, थोक आपूर्ति में खुदरा बिक्री की तुलना में तेजी से हुई बढ़ोतरी से पता चलता है कि यह बढ़त त्योहारों के लिए स्टॉक जमा करने की वजह से है। डीलरों के पास मौजूदा स्टॉक फाडा के सुझाए गए 21 दिनों के मुकाबले बढ़कर 33 से 35 दिन तक पहुंच गया है, जिसमें आधे से अधिक डीलरों ने उच्च स्टॉक की सूचना दी है। फाडा ने आगाह किया है कि अगस्त और सितंबर में वृद्धि का श्रेय कम आधार प्रभाव को जाएगा, क्योंकि पिछले साल जीएसटी 2.0 से पहले खरीदारों ने खरीद टाल दी थी। दीवाली और धनतेरस का नवंबर में पड़ना इस साल अक्टूबर की तुलना को और जटिल बनाएगा, जिससे थोक बिक्री के बजाय खुदरा बिक्री ही उद्योग के लिए असली कसौटी होगी।

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