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ईरान से दो-दो हाथ करेगा पाकिस्तान?

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब और लाल सागर में व्यावसायिक जहाजों के खिलाफ दी गई हालिया धमकियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इन धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया गया है। पाकिस्तान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह सऊदी अरब के साथ होने वाले व्यापार या वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाने वाली किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह बयान हूतियों की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सऊदी अरब पर तत्काल समुद्री नाकाबंदी लगाने की धमकी दी थी।

विदेश कार्यालय ने साफ किया कि सऊदी अरब के बंदरगाहों तक पहुंच रोकने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा खतरा है। पाकिस्तान ने कहा कि उसके ध्वजवाहक जहाजों या समुद्री हितों के खिलाफ किसी भी कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर संकट माना जाएगा। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी समुद्री परिसंपत्तियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आत्मरक्षा सहित सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच सितंबर 2025 में हुए सामरिक सहयोग और पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी हाल ही में सऊदी अरब पर हुए हूती मिसाइल हमलों की निंदा कर चुके हैं। हालांकि, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के लिए इस संघर्ष में तटस्थ रहना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

यमन के हूतियों को ईरान का प्रत्यक्ष समर्थन हासिल है, ऐसे में हूतियों पर पाकिस्तान की किसी भी संभावित कार्रवाई का सीधा असर ईरान के साथ उसके संबंधों पर पड़ सकता है। इस बीच, हूतियों की धमकियों के चलते लाल सागर में सुरक्षा चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। सऊदी क्रूड तेल ले जा रहे तीन टैंकरों को लाल सागर में मार्ग बदलकर स्वेज नहर की ओर रुख करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि यदि हूती नाकाबंदी लागू करते हैं, तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा। इन घटनाक्रमों से मध्य-पूर्व में तनाव और गहरा गया है।

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