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ईरान संघर्ष से रुपया दबाव में

नई दिल्ली । भारतीय रुपये ने नया ऐतिहासिक निम्नतम स्तर छू लिया है। इस सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपया 91.71 से 92.47 के बीच उतार-चढ़ाव करता दिखा और सप्ताह का बंद 92.46 प्रति डॉलर पर हुआ। यह पिछले सप्ताह के 91.75 प्रति डॉलर से कमजोर है। रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक जोखिम में वृद्धि और कच्चे तेल की कीमतों का तेज़ बढ़ना है।

ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 98.7 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करने की धमकी दी है, जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिका ने भी 13 मार्च को ईरान पर हमले तेज किए। आईएफए ग्लोबल के एक प्रमुख अघ्धिकारी का कहना है कि रुपये पर दबाव तब तक रहेगा जब तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है। उसे रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने और उधारी की लागत में तेज वृद्धि को रोकने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में 716.8 अरब डॉलर रहा, जो कुछ हद तक हस्तक्षेप की क्षमता देता है, लेकिन बढ़ते वैश्विक जोखिमों के बीच सीमित प्रभाव हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकारी बॉन्ड यील्ड निकट भविष्य में सीमित दायरे में रह सकती है। वहीं, रुपये पर दबाव जारी रहने की संभावना है, जब तक तेल की कीमतें ऊंची हैं और ईरान संकट हल नहीं होता। आरबीआई को सावधानीपूर्वक कदम उठाने की जरूरत है ताकि मुद्रा स्थिर रहे और आर्थिक उधारी की लागत नियंत्रण में रहे।


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