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कई विवादों के बीच भी फीफा मजबूत होकर उभरे

ब्यूनस आयर्स। फीफा विश्वकप फुटबॉल मुकाबले समाप्त होने के बाद फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो का कद और बढ़ गय है। ये काफी हैरानी की बात भी है क्योंकि विश्वकप में कई प्रकार के विवाद उठे। इसमें टिकट की भारी कीमतों के साथही  ईरान की टीम को अलग-थलग करने, सोमालिया के एक रेफरी पर प्रतिबंध लगाने जैसे जैसे कई विवादास्पद फैसले रहे। इसके अलावा अमेरिकी दबाव में आकर, फीफा ने उसके स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को रैफरी के लाल कार्ड दिखाने के बाद भी मैदान पर उतरने की अनुमति दी, जिसने नियमों पर सवाल खड़े किए। इन्फेंटिनो पर आरोप हैं कि वह इस दौरान केवल पैसा कमाने पर ध्यान दे रहे थे। फीफा को विश्व कप से सीधे तौर पर लगभग 9 बिलियन डॉलर की कमाई हुई है। ये कतर में हुए 2022 संस्करण से लगभग 2 बिलियन डॉलर अधिक है पर इस दौरान नियमों को ताक पर रख दिया गया। 

इन्फेंटिनो तब फीफा में आये थे। तब  फीफा घोटालों का पर्याय बन चुका था, और अमेरिकी अभियोजकों द्वारा भ्रष्टाचार के मामले की जांच के बाद तत्कालीन प्रमुख सेप ब्लैटर को हटा दिया गया था। इसके बाद इन्फेंटिनो को संगठन के नए चेहरे के तौर पर लाया गया। उन्होंने सुधारों की देखरेख की, पारदर्शिता बढ़ाई और फीफा के टूर्नामेंट्स के आकार व दायरे को काफी बढ़ाया। यह वित्तीय सफलता केवल फीफा तक सीमित नहीं रही। विश्व कप में पैसा हर किसी तक पहुंचा। स्टेडियम में खाने-पीने का काम संभालने वाले वेंडर्स को भारी फायदा हुआ; कुछ स्टेडियमों में प्रशंसकों ने प्रति गेम प्रति व्यक्ति 100 डॉलर तक खर्च किए। विज्ञापनदाताओं को अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक से फायदा हुआ, जिन्हें कथित तौर पर खिलाड़ियों को गर्मी से बचाने के लिए शुरू किया गया था। मेजबान शहरों ने भी, जिन्होंने टूर्नामेंट से पहले खर्च को लेकर शिकायत की थी, अपनी अर्थव्यवस्था में उछाल देखा। बैंक ऑफ अमेरिका के आंकड़ों के अनुसार, 10 से 21 जून के बीच मेजबान शहरों में क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले खर्च में पिछले साल के मुकाबले 6.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि बाहरी लोगों (गैर-स्थानीय लोगों) के खर्च में 16.7 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई।

टीमों के लिए कुल इनामी राशि रिकॉर्ड 871 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई। हर भाग लेने वाले देश को सिर्फ टूर्नामेंट में शामिल होने के लिए कम से कम 12.5 मिलियन डॉलर मिलने की गारंटी थी। जो टीमें आगे बढ़ीं, उन्होंने और भी अधिक कमाई की। उदाहरण के लिए, काबो वर्डे ने राउंड-ऑफ-32 तक पहुंचने पर 21 मिलियन डॉलर से अधिक कमाए, जो उसकी कुल जीडीपी का लगभग 0.75 प्रतिशत है।यह सब इसलिए अहम होगा क्योंकि 2027 में फीफा के चुनाव होने हैं, और इन्फेंटिनो का तीसरी बार चुना जाना लगभग तय है। वह निर्विरोध चुनाव लड़ रहे हैं और एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के संघ पहले ही उनका समर्थन कर चुके हैं। 

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