Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles
Advertisement

मां कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व

शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।

सृष्टि की रचयिता- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों तरफ अंधकार था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड (सृष्टि) की रचना की थी, इसलिए इन्हें श्कूष्मांडाश् (कुम्हड़ा/कद्दू जिससे ब्रह्मांड उत्पन्न माना गया) कहा जाता है।

अष्टभुजा देवी- मां कूष्मांडा के आठ हाथ हैं। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित हैं।

वाहन- माता का वाहन सिंह (शेर) है।

पूजा विधि और भोग

स्नान और संकल्प- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

 पूजन सामग्री- मां को जल, अक्षत, रोली, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

 प्रिय भोग- मां कूष्मांडा को मालपुआ, हलवा, दही, पेठा और हरे रंग के फल (जैसे हरे केले, अंगूर) का भोग अति प्रिय है।

 प्रिय रंग- इस दिन पीला, नारंगी या हरा रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है

Comments (0)

Leave a Comment