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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया गया था। बाद में 50,000 की जमानत सह व्यक्तिगत बॉन्ड भरने के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया। इन तीनों को सीजेपी के मुख्य चेहरों के तौर पर जाना जाता है। यह एक ऐसा आंदोलन है जिसने सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता हासिल की है।
सीजेपी के संस्थापक के तौर पर पहचाने जाने वाले अभिजीत दीपके एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन रणनीतिकार और पत्रकार हैं। उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की डिजिटल मीडिया टीम के साथ काम किया और दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन सलाहकार के तौर पर सेवा दी। यह भूमिका है दीपके की आजीविका के लिए उनके पेशेवर बैकग्राउंड को दर्शाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौजूदा सैलरी, निजी कमाई या फिर संगठन में उनके व्यक्तिगत योगदान की राशि का कहीं भी जिक्र नहीं है।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार और सूचना का अधिकार कार्यकर्ता के तौर पर काम करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वे खोजी पत्रकारिता और अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए लिखकर कमाते हैं। सौरभ दास ने कहा कि आंदोलन को स्थापित करते समय सदस्य अपनी बचत और कमाई पर निर्भर थे। उनकी व्यक्तिगत पेशेवर इनकम और समूह के साथ साझा खर्च अलग-अलग मामले हैं। उनकी कमाई या फिर सीजेपी गतिविधियों पर उनके द्वारा खर्च की गई राशि के लिए कोई खास आंकड़ा नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक रणनीतिकार और प्रवक्ता आशुतोष रांका आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएट हैं। उन्होंने लंदन में मैकिन्से में कंसल्टेंट के तौर पर काम किया है। इसके साथ वे दिल्ली असेंबली फैलोशिप और राजस्थान में जनहित से जुड़े कामों में भी जुड़े रहे हैं। यह जानकारी उनकी शिक्षा और प्रोफेशनल अनुभव के बारे में बताती है, लेकिन इससे उनके मौजूदा रोजगार या फिर अभी की कमाई का पता नहीं चलता। मौजूद जानकारी में सैलरी, निजी संपत्ति का अनुमान या फिर सीजेपी को दिए जाने वाले किसी भी आर्थिक योगदान का ब्योरा नहीं दिया गया है। इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि सीजेपी अपनी गतिविधि का खर्च उठा कैसे रही है।
सौरभ दास ने कहा है कि इन संसाधनों से ग्रुप की गतिविधि के शुरुआती दौर में खर्च उठाने में मदद मिली। नेताओं ने इस बात का भी जिक्र किया है कि सीजेपी का कोई रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट नहीं है और उसे विदेशी फंडिंग नहीं मिलती है। उनका कहना है कि कार्यक्रमों का खर्च विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर रखे डोनेशन बॉक्स, आम लोगों से मिलने वाले छोटे-मोटे स्वैच्छिक योगदान और शुभचिंतकों से मिलने वाली मदद से पूरा किया जाता है। ग्रुप की फंडिंग के बारे में जानकारी उसके नेताओं की निजी बचत, जन-दान और सामान के रूप में मिली मदद के बयानों पर आधारित है। कहीं पर भी विस्तृत वित्तीय रिकॉर्ड, इकट्ठा की गई रकम या खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया है।
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