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मौत की सजा पाए कैदी की दो इंजेक्शन के बाद भी नहीं हुई मौत

वॉशिंगटन। अमेरिका के टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाए एक कैदी क्रिस्टा पाइक को दो जहरीले इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी वह जिंदा बच गईं। यह हैरान कर देने वाला मामला राज्य में मृत्युदंड प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 50 वर्षीय पाइक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पाइक के वकील ने बताया कि उन्हें जहरीले इंजेक्शन दिए गए थे, लेकिन उनकी धड़कन चलती रही। पाइक बेहोश हो गईं, लेकिन उनके खर्राटे सुनाई दे रहे थे। इसके बाद आखिरी समय में कानूनी टीम द्वारा एक आपातकालीन याचिका दायर की गई। अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया है। बताया गया है कि पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो सिरिंज दी गई थीं, फिर भी उनकी धड़कन नहीं रुकी।

टेनेसी की गवर्नर बिल ली ने इस मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, असल में क्या हुआ है, यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है। राज्य में होने वाली मौत की सजा अब योजना के मुताबिक नहीं दी जा सकती। गवर्नर के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद पाइक को घातक इंजेक्शन देने की सभी प्रक्रियाओं को फिलहाल रोक दिया गया है। पाइक की कानूनी टीम ने इस घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि टेनेसी राज्य एक बार फिर कानूनी तौर पर मौत की सजा देने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि पाइक ने जिन मुद्दों को उठाया था, वे सच साबित हुए हैं।

इसमें नसों तक पहुंचने में दिक्कत, नसों का फट जाना और पेंटोबार्बिटल की खराब गुणवत्ता शामिल थी। क्रिस्टा पाइक को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर को प्रताड़ित करने और उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। यह मामला देशभर में सुर्खियों में आया था क्योंकि पीड़िता के शरीर पर पेंटाग्राम (पंचकोणीय तारा) उकेरा गया था। पाइक तब 18 साल की थी, जब उसने और उसके प्रेमी तडारिल शिप ने स्लेमर पर हमला किया था। अभियोजकों के मुताबिक, पाइक ने स्लेमर को बॉक्स कटर से काटा और पीटा, जबकि शिप ने उसके शरीर पर पेंटाग्राम उकेरने की बात स्वीकार की थी। पाइक को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि शिप, जो उस समय 17 साल का था, को उम्रकैद की सजा मिली।

पाइक ने हत्या से कभी इनकार नहीं किया, लेकिन उनके वकीलों ने तर्क दिया कि जूरी सदस्यों ने उन्हें मौत की सजा सुनाते समय उनके बचपन में हुए गंभीर यौन शोषण और उपेक्षा के पूरे इतिहास पर ठीक से विचार नहीं किया। बाद में पाइक को बाइपोलर विकार और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस विकार होने का भी पता चला। बचाव पक्ष का कहना है कि अपराध के समय उनकी मानसिक स्थिति के लिए ये बातें अहम थीं। जहरीला इंजेक्शन दिए जाने के तय समय से लगभग एक घंटे पहले, अमेरिका के छठे सर्किट अपीलीय न्यायालय ने पाइक के वकीलों की दलीलों की जांच करने के लिए इस पर अस्थायी रोक लगा दी थी। इन दलीलों में यह सवाल भी शामिल था कि क्या बचपन में उनके साथ हुए दुर्व्यवहार से जुड़े सबूतों पर ठीक से विचार किया गया था। 

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