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धूम्रपान छोडने के बाद आधा हो सकता है लंग कैंसर का खतरा- शोध

नई दिल्ली । धूम्रपान छोड़ने के बाद से ही शरीर में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। धूम्रपान छोडने के दस से पंद्रह साल में लंग कैंसर का खतरा करीब आधा हो जाता है। शोध के अनुसार, स्मोकिंग छोड़ने के 10 से 15 साल बाद लगातार धूम्रपान करने वालों की तुलना में लंग कैंसर का अतिरिक्त खतरा करीब आधा हो सकता है। 

सिगरेट छोड़ते ही शरीर में कई बदलाव शुरू हो जाते हैं। कुछ ही दिनों में खून में निकोटीन का स्तर खत्म होने लगता है और कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य स्थिति की ओर लौटता है। इसके बाद एक से 12 महीने के भीतर खांसी और सांस फूलने जैसी समस्याओं में कमी आ सकती है। वहीं, एक से दो साल के दौरान हार्ट अटैक का खतरा काफी कम होने लगता है। पांच से 10 साल के बीच मुंह, गले और वॉयस बॉक्स के कैंसर का अतिरिक्त खतरा भी लगभग आधा हो सकता है। लंग कैंसर के मामले में जोखिम कम होने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी होती है। शोध के अनुसार, सिगरेट छोड़ने के 10 से 15 साल बाद इसका अतिरिक्त खतरा उन लोगों की तुलना में करीब 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जो लगातार धूम्रपान करते रहते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार भी इस अवधि के बाद लंग कैंसर का जोखिम लगातार धूम्रपान करने वालों की तुलना में लगभग आधा हो सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि 15 साल बाद कैंसर का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों में जोखिम बना रह सकता है और समय के साथ धीरे-धीरे कम हो सकता है।

 विशेषज्ञों के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। किसी व्यक्ति ने कितने वर्षों तक सिगरेट पी है या उसकी उम्र कितनी है, इन परिस्थितियों के बावजूद धूम्रपान छोड़ने से स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। सिगरेट बंद करने के बाद फेफड़ों को हुए नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और समय के साथ लंग कैंसर का जोखिम घट सकता है। हालांकि, फेफड़ों के कैंसर का खतरा केवल धूम्रपान से ही तय नहीं होता। सेकेंडहैंड स्मोक, वायु प्रदूषण, रेडॉन और कुछ कार्यस्थलों पर मौजूद हानिकारक पदार्थ भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। मालूम हो कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है और इससे फेफड़ों के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। 

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