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पीएम से कहा था रिटायरमेंट के बाद मुझे कुछ नहीं- पूर्व जस्टिस

नई दिल्ली। पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने हाल ही में एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, दोनों पर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद कुछ भी न लेने की अपनी मंशा पीएम को बता दी थी। वहीं, उन्होंने अपने पूर्व साथी जस्टिस चंद्रचूड़ की न्यायिक क्षमता और कार्यशैली की प्रशंसा की, लेकिन कॉलेजियम के कुछ फैसलों पर अपनी असहमति भी स्पष्ट की है, जिसका जिक्र उनकी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में भी है।

जस्टिस कौल ने प्रधानमंत्री मोदी को बहुत अच्छे से बातों को सुनने वाले व्यक्ति बताया। उन्होंने अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति उनके लिए हमेशा एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। उन्होंने पीएम से लंबित नियुक्तियों पर ध्यान देने का अनुरोध किया था। जस्टिस कौल ने बताया, बातचीत कुछ समय तक चलती है और मैंने कहा कि आपको लगेगा कि मैं बहुत ज्यादा जोर दे रहा हूं। मैं आपसे यह इसलिए कह सकता हूं क्योंकि मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं पहले दिन से इस बात पर स्पष्ट था कि रिटायरमेंट पर मैं कुछ नहीं लूंगा। पीएम मोदी के जवाब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, उन्होंने जवाब दिया कि मुझे पता है३। वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें हर छोटी-बड़ी बात की जानकारी होती है। पूर्व जस्टिस कौल ने पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की तारीफ करते हुए कहा, जहां मुझे सही लगा मैंने उनकी तारीफ भी की। मैंने कहा कि उनमें न्यायिक दम है। वह बहुत मेहनत कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया पर कभी-कभी मामूली बातें राई का पहाड़ बन जाती हैं।

हालांकि, उन्होंने सीजेआई चंद्रचूड़ के साथ कुछ मतभेदों को भी खुलकर सामने रखा। पूर्व जस्टिस कौल ने कहा, मैं उनकी नियुक्ति प्रक्रिया के तरीके से असहमत था। उन्होंने महसूस किया कि सीजेआई  कभी-कभी बहुत नरम पड़ जाते थे और उन्हें थोड़ा और जोर लगाना चाहिए था, जिसके लिए वे उन्हें सुझाव भी दिया करते थे। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब मुख्य न्यायाधीश ने उनसे पूछा था कि क्या उन्हें सरकार की राय जानने के लिए फोन करना चाहिए। जस्टिस कौल का मानना है कि कॉलेजियम को अदालत की आजादी की रक्षा के लिए कार्यपालिका के दबाव का विरोध करना चाहिए।

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