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साइक्लोन अर्नब ने दी दस्तक, आंध्र प्रदेश में कहर शुरु

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के तट पर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान अर्नब कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि अर्नब का तट पर पहुंचना (लैंडफॉल) शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया काकीनाडा के पास यानम के आसपास चल रही है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात अर्नब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय था। यह पिछले छह घंटों में करीब 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा। मंगलवार शाम 5रू30 बजे यह काकीनाडा से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से 170 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम और मछलीपट्टनम से 170 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। इसके आगे बढ़ने के साथ ही आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बढ़ गया है। श्रीकाकुलम में भारी बारिश के साथ तेज हवा चलने की आशंका है। विशाखापत्तनम और काकीनाडा में तेज हवाओं का असर पहले ही महसूस किया जाने लगा है।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को बताया कि साइक्लोन ने समुद्र तट के पास पहुंचना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू लगातार अधिकारियों से संपर्क में हैं। वे इस गंभीर तूफान की गति और स्थिति पर हर घंटे अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने जिला कलेक्टरों और अधिकारियों के साथ कई समीक्षा बैठकें की हैं। सरकार का पूरा ध्यान लोगों की जान बचाने और नुकसान कम करने पर है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, तूफान की रफ्तार अनुमान से ज्यादा है। पहले दोपहर तक लैंडफॉल की बात कही जा रही थी, लेकिन अब यह तड़के 2 बजे से सुबह 4 बजे के बीच यानम-काकीनाडा क्षेत्र के पास पूरा होने की उम्मीद है। लैंडफॉल के समय हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, और झोंके 140-150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

बचाव और राहत की तैयारी

चक्रवात को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बड़े पैमाने पर बचाव और राहत की तैयारी की गई है। दोनों राज्यों में करीब 4,000 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं और संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। आंध्र प्रदेश सरकार ने 20 जिलों में 2,131 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार रखे हैं। प्रभावित इलाकों में 1,087 मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा 8,281 आपातकालीन बिस्तर और 1,274 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। 1,351 गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में पहुंचाया गया है। जरूरी सामान की कमी न हो, इसके लिए राशन दुकानों में दो महीने का आवश्यक भंडार भी रखा गया है।

50 से ज्यादा ट्रेनें रद्द 

रेल और हवाई यातायात पर भी चक्रवात का असर पड़ रहा है। एहतियात के तौर पर क्षेत्र में कम से कम 50 ट्रेनें रद्द की गई हैं। इनमें दक्षिण तटीय रेलवे की बुधवार के लिए निर्धारित 24 और ईस्ट कोस्ट रेलवे की 22 ट्रेनें शामिल हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे ने भी चार ट्रेनें रद्द की हैं। रेलवे ने करीब 600 किलोमीटर रेल पटरियों पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि तूफान के दौरान और उसके बाद रेल सेवाओं को सुरक्षित ढंग से बहाल करने के लिए इंतजाम किए गए हैं। विजयवाड़ा से चेन्नई और बेंगलुरु जाने वाली इंडिगो की 2 उड़ानें भी मंगलवार को रद्द कर दी गईं। कई तटीय सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए हैं।

50,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजेंगे

ओडिशा में भी चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए करीब 48,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी चल रही है। राज्य में 135 स्थायी और लगभग 1,600 अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अग्निशमन सेवाओं की कुल 294 टीमें तैनात की गई हैं। 8 जिलों में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भी बारिश दर्ज की गई है और अगले दो दिनों तक कई जिलों में भारी बारिश की आशंका है। झारखंड के रांची समेत कई जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल बंद रखने का आदेश दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और समुद्र तटों व जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

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