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रूस से कच्चा तेल सस्ता मिलने के बावजूद बीपीसीएल की कुल लागत बढ़


  • रूसी तेल पर छूट मिली
    , लेकिन उसका लाभ बढ़े हुए मालभाड़े (Freight) और बीमा (Insurance) के खर्च में खत्म हो गया।
  • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ा, जिससे जहाज कंपनियों और बीमा कंपनियों ने शुल्क बढ़ा दिए।
  • बीपीसीएल के अनुसार, हर बैरल पर लगभग 13–15 डॉलर का अतिरिक्त खर्च परिवहन और बीमा पर आया।
  • कंपनी के कुल कच्चे तेल में रूसी तेल की हिस्सेदारी 38% रही।
  • स्पॉट मार्केट से खरीद 44% से बढ़कर 69% हो गई, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अधिक पड़ने लगा।
  • रिफाइनिंग कारोबार अच्छा रहा और ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) 41.4 डॉलर प्रति बैरल रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक था।
  • इसके बावजूद खुदरा ईंधन बिक्री में नुकसान हुआ:
    • डीजल पर लगभग ₹25.2 प्रति लीटर का नुकसान।
    • पेट्रोल पर लगभग ₹7.7 प्रति लीटर का नुकसान।
    • एलपीजी पर ₹15,800 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि सरकार से केवल ₹1,900 करोड़ की भरपाई मिली।
    • विमान ईंधन (ATF) की बिक्री में भी नुकसान रहा।
  • नतीजतन, रिफाइनिंग से हुई अच्छी कमाई ईंधन बिक्री के नुकसान से काफी हद तक खत्म हो गई।

आगे की स्थिति:
बीपीसीएल ने सितंबर 2026 तक के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। लेकिन यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है, तो ऊंचा मालभाड़ा और बीमा लागत आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी के मुनाफे पर दबाव बनाए रख सकती है।

सरल शब्दों में:
सस्ता तेल खरीदना ही पर्याप्त नहीं होता। यदि उसे भारत तक लाने में परिवहन, बीमा और जोखिम की लागत बहुत बढ़ जाए, तो कुल लागत बढ़ जाती है और कंपनी का लाभ घट सकता है।

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