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उत्तराखंड में कलह

देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा के भीतर का घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले चकराता क्षेत्र में अनदेखी से नाराज भाजपाइयों ने अपनी ही सरकार के एक मंत्री के आवास का घेराव किया। अपनों के लगाए गंभीर आरोपों से आहत होकर मंत्री खजानदास ने दो टूक कहा कि यदि उन पर लगे आरोप साबित हुए तो वे मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और आत्महत्या कर लेंगे।

रविवार को यमुना कॉलोनी स्थित मंत्री आवास पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में यह आम चर्चा है कि 15 से 20 प्रतिशत कमीशन देकर विपक्षियों ने अपनी योजनाएं मंजूर कराई हैं। इससे जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। उनका दावा है कि कथित तौर पर कांग्रेस के लोगों को 80 प्रतिशत तक काम दिया गया, जबकि चुनावी वर्ष में भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री खजानदास पर जानबूझकर चकराता में भाजपा को कमजोर करने का आरोप लगाया।

इन आरोपों की तपिश से मंत्री खजानदास ने मीडिया से कहा कि 95 ब्लॉक में संतुलित विकास उनकी प्राथमिकता है। समाज कल्याण से जुड़ी अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र की योजनाओं के साथ ही स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (एससीपी) का बजट पूरे राज्य में बिना भेदभाव दिया गया। उन्होंने दावा किया कि चकराता को सबसे ज्यादा बजट मिला है और संतुलन बनाना जरूरी है, पर कुछ लोग सिर्फ अपनी बात मनवाना चाहते हैं। मंत्री और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही, जिसके बाद भाजपाइयों ने सोमवार को मुख्यमंत्री से मिलने और चकराता के प्रकरण को उनके समक्ष रखने का फैसला किया है। प्रदेश अध्यक्ष से भी इस संबंध में बात की गई है। देहरादून की चकराता विधानसभा सीट दशकों से कांग्रेस का मजबूत किला रही है, जहां वर्तमान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह विधायक हैं। इस दुर्ग को भेदने में जुटी भाजपा के लिए यह अंदरूनी कलह किसी बड़े झटके से कम नहीं है। धरने की अगुवाई कर रहीं मधु चौहान खुद चकराता से चुनाव लड़ चुकी हैं और उनके पति विकासनगर से भाजपा विधायक हैं।

उन्होंने बताया कि बजट वितरण में विपक्षी दलों के समर्थकों को तरजीह दिए जाने से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान लगे कथित नारों और तीखे बयानों ने सरकार से लेकर संगठन तक को असहज कर दिया है। चुनावी बेला से पहले अपने ही कार्यकर्ताओं की ओर से मंत्री पर आरोप लगाने से पार्टी असहज है और आलाकमान ‘डैमेज कंट्रोल’ की कवायद में जुट गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपाई मानते हैं या पार्टी संगठन कोई ठोस कदम उठाएगा।


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