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आखिर शराब पीने के बाद कुछ लोग उग्र और कुछ क्यों हो जाते हैं शांत

नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि शराब पीने के बाद कुछ उग्र और कुछ शांत क्यों हो जाते हैं। शराबी की इस हरकत का संबंध दिमाग और शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव से है। हैल्थ एक्सपर्ट की माने तो शराब मस्तिष्क के उन हिस्सों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, जो हमारे व्यवहार, फैसलों और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं।

यही कारण है कि नशे में व्यक्ति का व्यवहार उसके सामान्य व्यवहार से बिल्कुल अलग दिखाई दे सकता है। दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स निर्णय लेने, आत्म-नियंत्रण, सामाजिक व्यवहार और भावनाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शराब इसके काम को धीमा कर सकती है। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति सही और गलत के बीच सोच-समझकर फैसला लेने में कमजोर पड़ सकता है। जो बात वह सामान्य स्थिति में रोक लेता है, उसे नशे की हालत में बिना सोचे बोल या कर सकता है।

 इसी वजह से बहस, गाली-गलौज या आक्रामक व्यवहार की संभावना बढ़ सकती है। शराब का असर मस्तिष्क के रसायनों और तनाव से जुड़े तंत्र पर भी पड़ता है। शराब कुछ लोगों में उत्तेजना और आक्रामकता बढ़ा सकती है, जबकि कुछ लोगों में सुस्ती, भावुकता या शांत व्यवहार देखने को मिलता है। टेस्टोस्टेरोन और कॉर्टिसोल जैसे हार्माेन तथा मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर इस पूरी प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि शराब पीते ही हर व्यक्ति में टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है या सेरोटोनिन निश्चित रूप से घट जाता है। इसका असर व्यक्ति और परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। शराब के बाद आक्रामक व्यवहार केवल शरीर में होने वाले हार्माेनल बदलावों से तय नहीं होता। व्यक्ति का स्वभाव, उस समय का तनाव, शराब की मात्रा, पीने की गति, नींद की कमी और आसपास का माहौल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पहले से गुस्से या तनाव में रहने वाला व्यक्ति नशे में अपने व्यवहार पर नियंत्रण खोने की अधिक संभावना रख सकता है। 

भीड़भाड़ और शोर-शराबे वाला माहौल भी स्थिति को बिगाड़ सकता है। जब कई लोग शराब के नशे में हों, तो एक छोटी बहस तेजी से झगड़े में बदल सकती है। नशे की हालत में व्यक्ति दूसरों के व्यवहार को गलत तरीके से समझ सकता है और सामान्य बात को भी चुनौती या अपमान मान सकता है। इसलिए शराब के बाद होने वाला हंगामा केवल ‘गुस्से’ का मामला नहीं है। इसमें दिमाग की नियंत्रण क्षमता, शरीर की जैविक प्रतिक्रिया, व्यक्ति का स्वभाव और आसपास की परिस्थितियां मिलकर असर डालती हैं। यही वजह है कि एक ही मात्रा में शराब पीने वाले दो लोगों का व्यवहार बिल्कुल अलग हो सकता है। 

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