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एआई को लेकर विषेषज्ञों ने दी समय रहते तैयारी करने की सलाह

नई दिल्ली। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के अनुरूप समय रहते नीतियां तैयार नहीं की गईं, तो आने वाले वर्षों में रोजगार बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर दुनिया के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और वैज्ञानिकों ने सरकारों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों द्वारा विशेष रूप से दफ्तरों में कंप्यूटर आधारित कार्य करने वाले पेशेवरों पर इसका असर अधिक पड़ने की आशंका जताई गई है। इस विषय पर जारी एक खुले पत्र पर 15 नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित करीब 200 प्रमुख अर्थशास्त्रियों, वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें ओपनएआई के मुख्य अर्थशास्त्री तथा गूगल के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक का विकास पिछले सभी तकनीकी बदलावों की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से हो रहा है। पहले नई तकनीकों के आने पर लोगों और सरकारों को खुद को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए कई दशक मिल जाते थे, लेकिन एआई के मामले में यह बदलाव बहुत कम समय में हो सकता है।

 उनका अनुमान है कि अगले दस वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार संरचना को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में मौजूदा बेरोजगारी सहायता और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभाव उन कार्यों पर पड़ने की संभावना है, जिनमें दोहराव वाले और नियम आधारित काम अधिक होते हैं। डेटा एंट्री, बैक ऑफिस संचालन, रिकॉर्ड प्रबंधन, ग्राहक सहायता सेवाएं, कॉल सेंटर, शुरुआती स्तर की कंटेंट राइटिंग, अनुवाद, बेसिक प्रोग्रामिंग, कानूनी दस्तावेजों की प्रारंभिक समीक्षा तथा वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण जैसे कार्यों में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कई कार्य अब कम समय में और अधिक दक्षता के साथ स्वचालित प्रणालियों द्वारा किए जा सकते हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती उन व्हाइट कॉलर कर्मचारियों के सामने हो सकती है, जिनका काम मुख्य रूप से कंप्यूटर आधारित और नियमित प्रक्रियाओं पर निर्भर है। 

यदि किसी नौकरी में रचनात्मक सोच, जटिल निर्णय क्षमता, मानवीय संवाद और समस्या समाधान की भूमिका सीमित है, तो भविष्य में उस क्षेत्र में एआई का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि एआई पूरी तरह मानव श्रम का स्थान ले लेगा, ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अनेक क्षेत्रों में मानवीय निर्णय, अनुभव और संवेदनशीलता की आवश्यकता बनी रहेगी। खुले पत्र में सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे ऐसी नीतियां तैयार करें जो एआई को मानव श्रम का प्रतिस्पर्धी बनाने के बजाय सहयोगी तकनीक के रूप में विकसित करने को बढ़ावा दें। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कर्मचारियों के कौशल उन्नयन, नई तकनीकों का प्रशिक्षण और रोजगार बाजार के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

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