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महंगाई और कर्ज की मार से आम आदमी हलाकान

भारत में कर्ज और महंगाई की मार से आम आदमी बुरी तरह से परेशान है। इसमें कोई राहत मिलती हुई दिख नहीं रही है। उल्टे महंगा कर्ज और ईएमआई बढ़ने से आम आदमी बहुत परेशान हैं। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया रिसर्च की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक आफ इंडिया आने वाले समय में रेपो रेट और भी बढ़ा सकता है।

रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ने का असर सबसे ज्यादा आम आदमियों की ईएमआई और कर्ज के रूप में पड़ेगा। आम आदमी के ऊपर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता चला जा रहा है। नियमित खर्चे के लिए उसे कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है। महंगाई हर महीने बढ़ती चली जा रही है। महंगाई पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है। लगता है आम आदमी को कारोबारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। बाजार में मुनाफाखोरी लगातार बढ़ती चली जा रही है। स्टेट बैंक की जो रिपोर्ट जारी हुई है, उसके अनुसार जनवरी 2026 तक 22 वस्तुओं तक महंगाई सीमित थी अब वह बढ़कर 53 वस्तुओं पर पहुंच गई है। पेट्रोल, डीजल, गैस, दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक की लागत बढ़ने से इनकी कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। 

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आइल की कीमत बढ़ने से इसका असर हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ने के तौर पर हो रहा है। हाल ही में खाडी देशों के तीनों मार्गाे से जहाजों की आवाजाही बंद है। अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हुती हमले के बाद स्थितियां और भी नाजुक होती चली जा रही हैं। महंगाई, कर्ज और बेरोजगारी के साथ-साथ अब आर्थिक मंदी का संकट भी बड़ी तेजी के साथ गहरा रहा है। इसका असर वैश्विक स्तर पर हो रहा है। भारत में जिस तरह से महंगाई बढ़ती चली जा रही है, सरकार मुनाफाखोरी और महंगाई को रोकने की दिशा में ऐसा कोई प्रयास करती हुई नहीं दिख रही है, जिससे ऐसा लगे कि सरकार को आम आदमी की चिंता है। जिसके कारण अब आम जनता में तनाव भी देखने को मिल रहा है। भारत में पिछले वर्षों में कर्ज लेकर खर्च करने की प्रवृत्ति बड़ी तेजी के साथ बड़ी है। आम आदमी के ऊपर ब्याज और ईएमआई का दबाव लगातार बढ़ता चला जा रहा है, ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक की रेपो रेट को बढ़ाने से इसका असर गरीब और मध्यम वर्ग पर बड़े पैमाने पर होगा। महंगाई के कारण आम आदमी अपने रोजाना के खाने-पीने के खर्च और शिक्षा के खर्चे पूरे नहीं कर पा रहा है। महंगाई के कारण किचन में तेल और जरूरी सामान कम होते चले जा रहे हैं। बच्चों को पोषण आहार भी नहीं मिल पा रहा है। 

लोगों को लगता था सरकार महंगाई और मुनाफाखोरी पर नियंत्रण करेगी, लेकिन नियंत्रण के स्थान पर जिस तरह से कीमत बढ़ रही है और ब्याज दर भी बढ़ती चली जा रही है। ईएमआई में डिफॉल्ट होने के कारण एनबीएफसी कंपनियों और बैंकों द्वारा मनमाना ब्याज और जुर्माना  वसूल किया जा रहा है। जिसके कारण आम आदमी की नाराजी लगातार बढ़ती चली जा रही है। सरकार को समय रहते इस दिशा में उपयुक्त कार्रवाई करने की जरूरत है। जिस तरीके से लोग परेशान हैं, महंगाई के कारण रोजाना तनाव मे जीना पड़ रहा है। जरूरी खर्च के लिए अब उसे कर्ज भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। महंगाई और मुनाफाखोरी दोनों पर ही समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो हालत बद से बदतर हो सकते हैं। जिस तरह के हालात 1975 में बने थे। इस तरह के हालात अब बनते हुए दिख रहे हैं। जिन्होंने आपातकाल के पहले की महंगाई और मुनाफाखोरी को देखा है। उस समय के लोगों का कहना है, वर्तमान हालात उससे भी खराब हैं। स्थितियां अभी भी नियंत्रण में नहीं है। कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, कहा जा रहा है कि 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति में महंगाई को काबू में कर पाना सरकार के लिए और भी मुश्किल होगा। बेरोजगारी और काम नहीं होने के कारण आम आदमी की हालत वैसे ही खराब है। महंगाई ने जीना पूरी तरह से हराम कर दिया है। छोटे बच्चों को अब दूध भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों में गुस्सा बढ़ता चला जा रहा है। 

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