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राहुल और दीपके के आंदोलनों में बढ़ी खींचतान

नई दिल्ली। हाल के वर्षों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर वोट चोरी के आरोप लगाते रहे हैं। उनके इन आरोपों को उस समय और बल मिला जब एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति का दावा किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने बिना देरी किए इन आरोपों का खंडन किया, लेकिन नीट पेपर लीक आंदोलन से सुर्खियों में आई कॉकरोच जनता पार्टी ने इस मुद्दे को तुरंत भुनाने की कोशिश की। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उत्साहित अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर दी और तत्काल आंदोलन का ऐलान कर दिया।

कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस के मुद्दे भले ही एक जैसे हों, लेकिन दोनों ही दल एक-दूसरे का खुलकर साथ देने से कतरा रहे हैं। अभिजीत दीपके जब जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे, तब भी राहुल गांधी वहां नहीं पहुंचे थे। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर विपक्षी दलों को भी चौंका दिया था। ऐसा कहा जाता है कि कांग्रेस के इस कार्यक्रम की चर्चा बाकी विपक्षी दलों से नहीं की गई थी। बाद में उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय लेने की भी कोशिश की, हालांकि कई विपक्षी दल इसे कॉकरोच जनता पार्टी और अभिजीत दीपके की ही जीत मानते हैं। कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के इस मामले पर कोई भी चूक करना नहीं चाहती है, क्योंकि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ तमाम विपक्षी दल 2014 में केंद्र में भाजपा के आने के बाद से लगातार ईवीएम पर सवाल उठाते आ रहे हैं।

उनका दावा है कि ईवीएम के जरिए वोटों की हेराफेरी की जाती है। हालांकि, चुनाव आयोग इन आरोपों को लगातार झुठलाता रहा है। अब जब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, तो कांग्रेस अपने उन पुराने आरोपों के दम पर इस आंदोलन को अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहती है।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। उन्होंने लगातार दो दिनों तक इस मुद्दे पर आंदोलन किया और जंतर-मंतर जाने की कोशिश की। दोनों को उससे पहले ही हिरासत में ले लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मामले में विपक्षी इंडिया गठबंधन के घटक दलों को भी चौंका दिया है। बुधवार को जब दोनों आकाशवाणी परिसर में एक पेड़ के नीचे बैठ गए, तो उनके साथ किसी दूसरे दल के नेता नहीं दिखे। कहा गया कि किसी को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। एक विपक्षी नेता ने तो नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को भाई-बहन का शो बनाना चाहती है। दूसरी ओर, ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर अभिजीत दीपके फिलहाल पिछड़ते नजर आ रहे हैं। 


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