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लंबे समय तक भूखे पेट रहने से हो सकता है सिरदर्द

नई दिल्ली । ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक समय का खाना न खाने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हमारा दिमाग इस लापरवाही की भारी कीमत चुकाता है। लंबे समय तक भूखे पेट रहने या दो वक्त के भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर रखने से शरीर में कई रासायनिक और हार्माेनल बदलाव होते हैं, जो सिरदर्द का बहुत बड़ा कारण बनते हैं। इसे चिकित्सीय भाषा में फास्टिंग हेडेक या हंगर हेडेक कहा जाता है। विशेष रूप से जो लोग पहले से ही माइग्रेन की समस्या से पीड़ित हैं, उनके लिए खाली पेट रहना माइग्रेन के भयानक हमले को सीधे तौर पर आमंत्रित करने जैसा है। भोजन न करने पर सिरदर्द होने के पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि जब पेट लंबे समय तक खाली रहता है, तो रक्त में मौजूद ग्लूकोज का स्तर धीरे-धीरे गिरने लगता है। चूंकि दिमाग अपनी ऊर्जा के लिए पूरी तरह से ग्लूकोज पर निर्भर रहता है, इसलिए शुगर का स्तर गिरते ही दिमाग की रक्त वाहिकाओं में संकुचन और तनाव पैदा होने लगता है। 

इसके अलावा, पेट खाली रहने पर शरीर तनाव पैदा करने वाले हार्माेन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन को स्रावित करने लगता है, ताकि शरीर में जमा ऊर्जा का उपयोग किया जा सके। ये तनाव हार्माेन दिमाग की नसों को अत्यधिक संवेदनशील बना देते हैं, जिससे सिर में तेज धड़कन जैसा दर्द शुरू हो जाता है। इसके साथ ही, भूखे रहने पर पेट में अत्यधिक गैस्ट्रिक एसिड बनता है, जिससे एसिडिटी, जी मिचलाना और सिर के माथे वाले हिस्से में भारीपन व तेज दर्द होने लगता है। अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन के अनुसार, माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द से बचने के लिए जीवनशैली में अनुशासन और भोजन का सही समय तय होना बेहद अनिवार्य है।

 किसी भी स्थिति में सुबह का नाश्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि रात के 8-10 घंटे के उपवास के बाद दिमाग को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है। जो लोग वजन घटाने के चक्कर में अचानक कठोर डाइटिंग या इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू कर देते हैं, उनमें भी सिरदर्द की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि दिनभर में बहुत लंबा गैप रखने के बजाय हर तीन से चार घंटे में थोड़े-थोड़े अंतराल पर कुछ न कुछ हल्का और पौष्टिक (जैसे फल, मेवे या छाछ) खाते रहना चाहिए। यदि भोजन में देरी होने की वजह से बार-बार सिर में तेज दर्द फटने लगता है, तो अपनी दिनचर्या में सुधार करें और आवश्यकता पड़ने पर किसी न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें। मालूम हो कि आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में समय की कमी का हवाला देकर सुबह का नाश्ता छोड़ देना या दोपहर का खाना काफी देर से खाना एक बहुत आम आदत बन चुकी है। 

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