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शी जिनपिंग का भारत दौरा अगस्त में ही मांग लिए थे 67 वीजा

व्यापार, सीमा और वैश्विक रणनीति पर होगी बात

नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा, जिसमें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य और शी के करीबी माने जाने वाले कैई ची तथा चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल होंगे। इन सबके लिए बीते माह यानी अगस्त में वीजा मांगे गए थे। 

शी जिनपिंग की यह यात्रा करीब 24 घंटे की होगी, वे शनिवार दोपहर 12रू10 बजे भारत पहुंचेंगे और अगले दिन दोपहर 12.20 बजे रवाना होंगे। शनिवार करीब 2 बजे वह भारत मंडपम पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेता उनका स्वागत करेंगे। खास बात यह है कि शी की यात्रा की घोषणा भले ही 10 सितंबर को हुई, लेकिन चीन ने भारतीय पक्ष को उनकी यात्रा के बारे में कई सप्ताह पहले ही औपचारिक रूप से बता दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अगस्त को चीन ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल के लिए वीजा जारी करने का अनुरोध किया था। दोनों नेताओं की मुलाकात शनिवार शाम होने की संभावना है, जिसमें भारत-चीन संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दे उठ सकते हैं।

भारत की ओर से प्रधानमंत्री मोदी व्यापार घाटा, चीनी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच, भारत में निवेश की कमी, वीजा संबंधी प्रतिबंध और भारत में चीनी कंपनियों की गतिविधियों जैसे मुद्दों पर जोर दे सकते हैं। साथ ही, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने, सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन से जुड़ी बातचीत को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई सीमा सैन्य हॉटलाइन तथा सैन्य कमांडर स्तर की बैठकों के लिए दो नए स्थल जैसी सहमतियां बनी थीं, जिनकी समीक्षा की जा सकती है। पिछली कुछ मुलाकातों के बाद दोनों देशों के संबंधों को स्थिर करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा प्रतिबंधों में ढील और चीनी निवेश पर लगी कुछ पाबंदियों में ढील शामिल है। हालांकि, वीजा, भारतीय कारोबारियों पर प्रतिबंध और सीमा पार नदियों से जुड़े आंकड़ों को साझा करने जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। 

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