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राजनेताओं और रसूखदारों को बचाने के प्रयास के आरोप /27 Sep 2022 02:03 AM/    40 views

अंकिता हत्याकांड ने पुलिस की भूमिका पर बवाल

राहुल शर्मा
नई दिल्ली । उत्तराखंड का अंकिता हत्याकांड उत्तराखंड सरकार, पुलिस और भाजपा के लिए भारी मुसीबत को लेकर आया है। पहाड़ी इलाके में इस घटना की बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया हुई है।जिस तरह से पुलिस मामले को दबा रही है। उसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया जनमानस में देखने को मिल रही है। इस मामले की जांच निष्पक्षता से नहीं की गई, और दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया। इसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ सकता है। पहाड़ के लोग संवेदनशील हैं।जिस तरह से यह आंदोलन उग्र होता जा रहा है। उससे सरकार की मुसीबतें बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों को जो 5 संदेह हैं। पुलिस को इसका निराकरण करना चाहिए।
1.अंकिता के चैट में जिस वीआईपी को अतिरिक्त सेवा देनी थी। जिसके लिए उसे 10000 रुपये देने की पेशकश की गई थी।उस गेस्ट का नाम पुलिस नहीं बता रही है। चैट में यह भी लिखा था कि वीआईपी गेस्ट हमेशा यहां पर आते हैं। उन्हें एक्स्ट्रा सर्विस देने के लिए दबाव बनाया जाता है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों से पूछताछ भी नहीं की,और आरोपियों को रिमांड में लेने के स्थान पर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
2. वीआईपी के लिए जो कमरा बुक था-उसमें आग क्यों लगा दी गई। आगजनी करने वाले कौन थे। फॉरेंसिक टीम के पहुंचने के पहले ही उस कमरे आग किसके द्वारा लगाई गई है। यह भी पुलिस स्पष्ट नहीं कर पा रही है।
3. अंकिता की मौत कब हुई- इसको लेकर भी पुलिस मौन है। यदि 5 दिन पहले उसे नहर में फेंका गया था। तो उसकी लाश को पानी में फूल जाना चाहिए था। जो नहीं फूली थी। 5 दिन तक मछलियों ने भी अंकिता की शव को नहीं खाया। यह बात स्थानीय लोगों की समझ में नहीं आ रही है। उन्हें लग रहा है कि आरोपियों और रसूखदारों को बचाया जा रहा है।
4. परिवार के मर्चुरी में पहुंचने के पहले ही भाजपा विधायक रेणु विष्ट मर्चुरी में क्या कर रही थी। पुलिस ने बताया 24 सितंबर को शव बरामद हुआ था। सूचना के बाद अंकिता के पिता और भाई नहर पर गए थे। तब उन्हें पुलिस ने शव नहीं दिखाया। जिससे स्थानीय लोगों को आशंका है कि अंकिता की मौत मारपीट से कहीं और हुई है। नहर की कहानी पुलिस आरोपियों को बचाने के लिए गढ़ रही है।
5. रिसोर्ट पर बुलडोजर चलाया गया। रिसार्ट की दिवाल गिराई गई। लेकिन स्ट्रक्चर को सुरक्षित रखा गया,जब तोड़फोड़ हो रही थी।उस समय भाजपा विधायक वहां उपस्थित थी। रिसोर्ट पर बुलडोजर और आगजनी किसके इशारे पर हुई। इसको लेकर भी पुलिस जिला प्रशासन और सरकार एक दूसरे के ऊपर पल्ला झाड़ रही हैं। 
अंकिता हत्याकांड को लेकर रसूखदारों को बचाने के जो आरोप लग रहे हैं। यह आरोप इसलिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं, कि यह आरोप जनता लगा रही है। 
सरकार को इस मामले में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निष्पक्ष कार्यवाही करनी चाहिए। अन्यथा यह मामला तूल पकड़ सकता है। भाजपा को इससे बड़ा नुकसान उत्तराखंड और देश में हो सकता है।

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