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आजम खान के साथ अन्याय न करें-अखिलेश यादव /23 Sep 2022 04:48 AM/    35 views

आजमगढ़ में मिली हार के बाद अखिलेश ने बदली रणनीति

लखनऊ । ज्यादा दिन नहीं हुए जब समाजवादी पार्टी नेतृत्व और पूर्व सीएम अखिलेश यादव से विधायक आजम खान की नाराजगी की खबरें सुखियों में थीं। सीतापुर की जेल में रहने के दौरान अखिलेश कभी आजम से मिलने नहीं गए। जेल से बाहर आने के बाद आजम भी इशारों ही इशारों में अखिलेश पर निशाना साधते रहे, लेकिन अखिलेश ने मामले पर चुप्पी साधे रखी। अखिलेश और आजम के बीच बढ़ती दूरियां यूपी की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गई थीं। फिर भी अखिलेश इन चीजों की परवाह करते नहीं दिखे लेकिन रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में सपा की हार के बाद लगता हैं, अखिलेश ने रणनीति बदल दी है। पिछले कुछ दिनों से सपा और उन्होंने खुद आजम खान के मुद्दे पर मुखर होकर बोलना शुरू कर दिया है। दो दिन पहले उन्होंने विधानसभा में भी आजम की यूनिवर्सिटी की जांच का मुद्दा उठाया था। शुक्रवार को 12 विधायकों के साथ राजभवन पहुंचकर उन्होंने आजम खान के मामले पर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। राजभवन से निकलने के बाद अखिलेश ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल से मामले में दखल देकर आजम खान को इंसाफ दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आजम खान पर जिस तरह लगातार मुकदमे लगाए जा रहे हैं, उन्हें लेकर राज्यपाल को जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि हमने आग्रह किया है कि आपके माध्यम से न्याय मिल सकता है। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार लगातार आजम खान और उनके परिवार पर झूठे मुकदमे लगा रही है। आजम खान बीमार हैं। हमने निवेदन किया कि राज्यपाल सरकार से कहें कि आजम खान के साथ अन्याय न करें। सपा के प्रतिनिधिमंडल में शामिल विधायकों ने भी कहा कि राज्घ्यपाल से मुलाकात के दौरान आजम खान के विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी गई। 
पिछले विधानसभा चुनाव और उसके बाद आजमगढ़-रामपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद अखिलेश ने अपनी रणनीति में कई बदलाव किए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दरअसल, अखिलेश ने यह समझ लिया है, कि उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव और यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव तक पार्टी को बीजेपी से मुकाबले के लिए तैयार रखना है, तब फिर पार्टी में पूरी तरह एकजुटता कायम करनी होगी। इसी क्रम में उन्होंने पार्टी के पुराने नेताओं और सिपहसलारों को नए से सिरे जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। पिछले दिनों आजमगढ़ जाकर जेल में बंद रमाकांत यादव से मुलाकात करना और लगातार आजम खान का मुद्दा उठाना इसी रणनीति का हिस्सा है। 
 

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